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कुंभ 2019ः सीएम के आने पर बोले श्रीमहंत धर्मदास, कहा- राम जन्मभूमि आंदोलन के साथी के नाते आ रहे योगी

Sat, 05 Jan 2019 02:08 AM IST
देव कश्यप अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज
अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Sat, 05 Jan 2019 02:08 AM IST
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Kumbh 2019: CM coming as a partner of the Ram Janmabhoomi movement
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ संत के नाते ही नहीं राम जन्मभूमि आंदोलन के नाते भी हमारे साथी हैं। गुरुभाई के नाते, साधु के नाते आ रहे हैं। रिश्ते तो कई हैं। हमने निवेदन किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया और वह आ रहे हैं। बाबा दिग्विजय नाथ, बाबा अभिराम दास और फिर महंत अवैद्यनाथ जी हम लोगों के साथ रामजन्म भूमि आंदोलन में रहे और योगी आदित्यनाथ आए तो यह भी रहे। ईश्वर की कृपा से अगर मुख्यमंत्री बन गए हैं तो उनका हर समय प्रयत्न रहेगा कि राम मंदिर बने, राम मंदिर का कार्य हो।

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‘अमर उजाला’ से बातचीत में रामजन्म भूमि आंदोलन के मुख्य पक्षकार और निर्वाणी अनी के श्रीमहंत धर्मदास ने कहा कि अब मामला अदालत में है। प्रधानमंत्री ने राम मंदिर को लेकर जो बयान दिया है, वही आना ही था क्योंकि कोर्ट में केस है। वह कानून से अलग थोड़े ही हैं। विश्व हिंदू परिषद के लोग और मोहन भागवत जो कानून लाने की मांग कर रहे थे, ऐसा लगता है कि उन्हें अपनी वाणी का महत्व ही नहीं पता है। जो चीज होने वाला नहीं, उसे क्यों मांग रहे हैं।

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Kumbh 2019: CM coming as a partner of the Ram Janmabhoomi movement
cm yogi - फोटो : अमर उजाला

कहा, पहले अदालत ने कहा था कि रोज सुनवाई करके मामले का जल्द से जल्द निपटारा किया जाएगा, लेकिन अब अदालत के लिए यह मुद्दा प्राथमिकता में नहीं है। इसका फैसला जल्द से जल्द आना चाहिए। जनभावनाओं को देखते हुए जरूरी है कि राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के पक्ष में जल्द से जल्द फैसला आए। राम जन्मभूमि का मामला राष्ट्रीय अस्तित्व का मामला है। इसमें हिंदू और मुसलमान दोनों ही इस मामले में एक साथ हैं। जहां तक बैरागियों के शिविर की बात है, सभी बैरागी अखाड़ों और उनके खालसों के शिविरों में रोजाना हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ होगा ताकि राम मंदिर निर्माण का मार्ग निष्कंटक हो।

Kumbh 2019: CM coming as a partner of the Ram Janmabhoomi movement
योगी आदित्यनाथ - फोटो : Getty

बैरागियों के अखाड़े सनातन धर्म की विशिष्ट परंपरा के संवाहक हैं। इनके ध्वज भले ही अलग-अलग हैं लेकिन आराध्य राम और उपासना पद्धति एक ही है। दिगंबर अनी अखाड़े की ध्वजा पंचरंगा है। वहीं निर्वाणी अनी की धर्मध्वजा लाल और निर्मोही अनी की धर्मध्वजा श्वेत रंग की है। तीनों ही धर्मध्वजाओं में शीर्ष पर मोरपंख लगे हैं।

दिगंबर अनी अखाड़े की स्थापना स्वामी बालांनद ने 15वीं सदी में की थी। अखाड़े के साधु-महात्मा राम, कृष्ण, अंबा, गणेश सूर्य आदि के उपासक हैं। वैष्णव परंपरा के प्रचार प्रसार में समर्पित दिगंबर अनी के संत कुंभ में रामनाम की अलख जगाएंगे। श्रीपंच निर्वाणी अनी अखाड़ा की स्थापना बालानंद ने की थी। इसके इष्टदेव हनुमान जी हैं। इसमें शामिल सभी छह अखाड़े भगवान राम केनाम का गुणगान करते हैं। वहीं निर्मोही अनी अखाड़ा के संत श्रीहरि विष्णु के उपासक हैं। इनके साधक भगवान राम और कृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं। इसका मुख्यालय वृंदावन में हैं।

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