KP Trust : पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुशील सिन्हा का 13 माह का कार्यकाल शून्य घोषित, वित्तीय अनियमितता की होगी जांच
पुनर्मतगणना में केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किए गए चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह की अध्यक्षता में रविवार को गवर्निंग कौंसिल की पहली बैठक हुई। इसमें पूर्व अध्यक्ष टीपी सिंह ने कानूनी रूप से डॉ. सुशील कुमार सिन्हा के 13 महीने के कार्यकाल को शून्य घोषित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
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कायस्थ पाठशाला गवर्निंग कौंसिल की रविवार को केपी इंटर कॉलेज सभागार में हुई साधारण बैठक में केपी ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार सिन्हा का 13 माह का कार्यकाल शून्य घोषित कर दिया गया। साथ ही नियमों की अनदेखी एवं वित्तीय अनियमितताओं का प्रस्ताव पारित करते हुए जांच कराने का निर्णय लिया गया।
पुनर्मतगणना में केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किए गए चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह की अध्यक्षता में रविवार को गवर्निंग कौंसिल की पहली बैठक हुई। इसमें पूर्व अध्यक्ष टीपी सिंह ने कानूनी रूप से डॉ. सुशील कुमार सिन्हा के 13 महीने के कार्यकाल को शून्य घोषित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
टीपी सिंह ने कहा कि पूर्व अध्यक्ष के 13 महीने के कार्यकाल में 45 लाख रुपये वकीलों की फीस पर खर्च किए गए। इसकी जांच हो और डॉ. सिन्हा से ट्रस्ट के रुपयों की वसूली हो। जांच के लिए वित्त समिति का गठन किया गया और ट्रस्ट के तहत संचालित शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन के लिए केवल अंतरिम बजट पास किया गया।
अधिवक्ता चौधरी कौशलेंद्र नाथ सिंह ने आरोप लगाया कि पूर्व के कार्यकाल में नियमों की अनदेखी की गई है। मनमाने तरीके से नियम बनाकर नियमावली से छेड़छाड़ की गई है। ऐसी स्थिति में फिर से नई सलेक्ट कमेटी बनाई जाए, जो नियमों की समीक्षा करते हुए आवश्यक संशोधन करे।
इस प्रस्ताव को पारित करते हुए सेलेक्ट कमेटी के गठन का निर्णय लिया गया। नियमों में संशोधन के बाद ही 100 रुपये के शुल्क पर सदस्य बनाने का अभियान शुरू किया गया था। ऐसे में 100 रुपये के सदस्यता शुल्क का प्रावधान अगली बैठक में समाप्त किया जा सकता है।
यह तय किया गया कि सेलेक्ट कमेटी और वित्त समिति की रिपोर्ट आने पर एक माह बाद गवर्निंग कौंसिल की अगली बैठक होगी और उसमें बजट भी पारित किया जाएगा। बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि डॉ. सिन्हा के कार्यकाल में हुई कार्यवाही की पुष्टि तो लिखी गई है लेकिन उस पर तिथि अंकित नहीं है।
जब किसी कार्यवाही पर तिथि ही नहीं है, तो उसकी पुष्टि कैसे मानी जा सकती है। इसके साथ ही चेक के माध्यम से छह लाख रुपये निकालने और उसकी कोई लिखित जानकारी न होने के कारण जांच कराने का निर्णय लिया गया।
बैठक का संचालन महामंत्री एसडी कौटिल्य ने किया। इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह, उपाध्यक्ष वित्त वित्त एस. लाल, डॉ. केके श्रीवास्तव, अनिल कुमार श्रीवास्तव, कौशलेंद्र नाथ सिंह, रवि श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, अरुण कुमार श्रीवास्तव, रमेश श्रीवास्तव, आनंद मोहन, केसी श्रीवास्तव, सुमित श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव, अभिनव श्रीवास्तव, भारती वर्मा, नवीन सिन्हा, विजय कृष्ण आदि उपस्थित रहे।