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किसान को कागज पर मारकर हथिया ली जमीन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 25 Mar 2016 12:19 AM IST
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भूमाफिया ने अफसरों से साठगांठ कर कागज पर किसान को मारकर उसकी लाखों रुपये की जमीन हथिया ली। बाद में किसान को इसकी भनक लगी तो वह करछना तहसील पहुंच गया और शासन में शिकायत करने की चेतावनी दी। खुद को फंसता देख अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए पुराने आदेश को प्रभावी होने से रोक दिया। मामला करछना के पनासा गांव का है। यह जमीन करछना पावर प्लांट के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि के ठीक बगल में है।
जून-2014 में सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर बिरजू को मृतक दिखा दिया गया और जमीन उसके पुत्र अमर जीत के नाम पर कर दी गई। पांच माह बाद यानी नवंबर 2014 में अमर जीत को जमीन का विक्रेता दिखाकर भूमि पर क्रेता मैकू का नाम चढ़ा दिया गया। यह नाम नायब तहसीलदार के आदेश पर चढ़ाया गया। मैकू एक ग्राम प्रधान का मजदूर है। बिरजू को इसकी भनक लगी तो वह तहसील पहुंचा और हंगामा शुरू कर दिया। मामले में ग्राम प्रधान, अफसर और भूमाफिया फंसने लगे तो पिछले महीने यानी फरवरी 2016 में पुराने आदेश को स्थगित कर दिया गया और अग्रिम आदेश आने तक पुराने आदेश के प्रभावी होने पर रोक लगा दी गई।
हालांकि नियमानुसार स्थगन का आदेश एसडीएम को जारी करना चाहिए था लेकिन अफसर मामले में इतनी तेजी से फंसते जा रहे थे कि यह स्थगनादेश भी नायब तहसीलदार ने जारी कर दिया। बिरजू की जमीन की खतौनी निकाली गई तो पूरा मामला सामने आया। तहसील के सूत्रों का कहना है कि यह तो एक उदाहरण है। पावर प्लांट के लिए अधिग्रहीत जमीन पर चहारदीवारी का निर्माण शुरू होने पर आसपास की जमीन के भाव इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि अन्य किसानों की जमीन हथियाने के लिए भी भूमाफिया ने कुछ अफसरों से साठगांठ कर ली है।
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मामला खुलने पर सामने आए तीन बिरजू
दस्तावेजों में हेरफेर कर किसान को मृतक साबित करने और उसकी जमीन किसी दूसरे को बेच दिए जाने का मामला सामने आने के बाद अब जमीन पर दावा करने बिरजू नाम के तीन लोग सामने आ गए हैं। हालांकि यह तो तय है कि इनमें से कोई एक असली बिरजू है, जिसे गलत तरीके से मृतक साबित किया गया और उसकी जमीन हथियाने की कोशिश की गई। सूत्रों का कहना है कि मामले को उलझाने के लिए भूमाफिया ने बिरजू नाम के दो नए लोगों को सामने लाकर खड़ा कर दिया है ताकि इसमें भूमाफिया का साथ देने वाले अफसरों को बचाया जा सके और यह पूरा मामला दूसरी दिशा में मोड़ दिया जाए।
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जून-2014 में सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर बिरजू को मृतक दिखा दिया गया और जमीन उसके पुत्र अमर जीत के नाम पर कर दी गई। पांच माह बाद यानी नवंबर 2014 में अमर जीत को जमीन का विक्रेता दिखाकर भूमि पर क्रेता मैकू का नाम चढ़ा दिया गया। यह नाम नायब तहसीलदार के आदेश पर चढ़ाया गया। मैकू एक ग्राम प्रधान का मजदूर है। बिरजू को इसकी भनक लगी तो वह तहसील पहुंचा और हंगामा शुरू कर दिया। मामले में ग्राम प्रधान, अफसर और भूमाफिया फंसने लगे तो पिछले महीने यानी फरवरी 2016 में पुराने आदेश को स्थगित कर दिया गया और अग्रिम आदेश आने तक पुराने आदेश के प्रभावी होने पर रोक लगा दी गई।
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हालांकि नियमानुसार स्थगन का आदेश एसडीएम को जारी करना चाहिए था लेकिन अफसर मामले में इतनी तेजी से फंसते जा रहे थे कि यह स्थगनादेश भी नायब तहसीलदार ने जारी कर दिया। बिरजू की जमीन की खतौनी निकाली गई तो पूरा मामला सामने आया। तहसील के सूत्रों का कहना है कि यह तो एक उदाहरण है। पावर प्लांट के लिए अधिग्रहीत जमीन पर चहारदीवारी का निर्माण शुरू होने पर आसपास की जमीन के भाव इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि अन्य किसानों की जमीन हथियाने के लिए भी भूमाफिया ने कुछ अफसरों से साठगांठ कर ली है।
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मामला खुलने पर सामने आए तीन बिरजू
दस्तावेजों में हेरफेर कर किसान को मृतक साबित करने और उसकी जमीन किसी दूसरे को बेच दिए जाने का मामला सामने आने के बाद अब जमीन पर दावा करने बिरजू नाम के तीन लोग सामने आ गए हैं। हालांकि यह तो तय है कि इनमें से कोई एक असली बिरजू है, जिसे गलत तरीके से मृतक साबित किया गया और उसकी जमीन हथियाने की कोशिश की गई। सूत्रों का कहना है कि मामले को उलझाने के लिए भूमाफिया ने बिरजू नाम के दो नए लोगों को सामने लाकर खड़ा कर दिया है ताकि इसमें भूमाफिया का साथ देने वाले अफसरों को बचाया जा सके और यह पूरा मामला दूसरी दिशा में मोड़ दिया जाए।