Kaushambi Blast News : पटाखा फैक्टरी में वेल्डिंग की चिंगारी से लगी थी आग, पलट झपकते ही आग का गोला बन गया कारख
एसआरएन हॉस्पिटल में भर्ती तीन गंभीर मरीजों में से एक हैं चमंधा के मुकेश कुमार।डॉक्टरों के मुताबिक वह 85 फीसदी तक झुलसे हैं। जैसे-तैसे बुदबुदाते हुए मुकेश ने अमर उजाला को बताया कि उनके पिता हरिलाल करीब चार साल से खल्लाबाद स्थित पटाखा फैक्टरी में काम रहे थे।
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कौशाम्बी पटाखा फैक्टरी के अंदर वेल्डिंग हो रही थी, जिसकी चिंगारी से बारूद ने रविवार को ऐसी आग पकड़ी कि पलक झपकते पूरी फैक्टरी आग का गोला बन गई। हादसे में आठ जानें तो गईं ही, अस्पताल में भर्ती चार लोगों की हालत अब भी गंभीर है। बारूद के धमाकों के बीच फंसे पिता को बचाने की कोशिश में 85 फीसदी झुलसने पर एसआरएन हॉस्पिटल में जिंदगी-मौत से जूझ रहे एक ऐसे ही पीड़ित ने इसका खुलासा किया है।
एसआरएन हॉस्पिटल में भर्ती तीन गंभीर मरीजों में से एक हैं चमंधा के मुकेश कुमार। डॉक्टरों के मुताबिक वह 85 फीसदी तक झुलसे हैं। जैसे-तैसे बुदबुदाते हुए मुकेश ने अमर उजाला को बताया कि उनके पिता हरिलाल करीब चार साल से खल्लाबाद स्थित पटाखा फैक्टरी में काम रहे थे। दो साल पहले मैं भी वहां जाने लगा। रविवार को आम दिनों की तरह ही माहौल था। मशीन का कुछ हिस्सा टूट गया था, जिसकी वेल्डिंग की जा रही थी।
करीब 11 बजे का वक्त रहा होगा। स्काई शाट्स पटाखों में बारूद भरकर उनके नीचे मिट्टी का लेप लगाकर सुखाया जा रहा था। उसी दौरान मैं वाशरूम के लिए कमरे से बाहर निकला। क्षणभर हुआ होगा कि वेल्डिंग की चिंगारी वहां सूख रहे पटाखों तक पहुंच गई। जलते पटाखे छत से टकराकर पूरे हॉल में गिरने लगे। देखते ही देखते वहां रखे पटाखों के ढेर और खुली बारूद ने आग पकड़ ली। एक के बाद एक धमाके होने लगे।
नहीं मिला भागने का मौका
यह सब इतनी तेजी से हुआ कि काम कर रहे 15 लोगों को भागने का मौका तक नहीं मिला। मेरे पिता हरिलाल भी आग की लपटों में घिर गए। मैं उन्हें बचाने के लिए बढ़ा, लेकिन उन तक पहुंच नहीं सका। आग में खुद घिरा तो जान बचाते बाहर भागा। पिता आंखों के सामने जिंदा जल गए...यह बताते हुए मुकेश की आंखें भर आईं। करीब 11.30 बजे भाई राकेश को फोन करके घटना बताई। एक दिन पहले गया था एक गाड़ी मालः मुकेश के मुताबिक एक दिन पहले ही फैक्टरी से एक गाड़ी पटाखे बाहर जा चुके थे। रविवार को अगर यह भी अंदर रखे होते तो शायद कोई नहीं बचता।
राजेंद्र आखिरी दिन आया था काम पर
85 फीसदी झुलसे बहरिया निवासी राजेंद्र (15) के पिता राजेश बताते हैं कि बेटा रविवार को पुराना हिसाब करने गया था। तभी, यह हादसा हो गया। एसआरएन के डॉ. मोहित जैन बताते हैं कि मुकेश व राजेंद्र की स्थिति गंभीर हैं। तीसरे, राजेश कुमार 60 फीसदी झुलसे हैं, जबकि कौसर अली एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं।