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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Kashi Vishwanath temple and Gyanvapi mosque dispute: Questions raised on the existence of mosque in Allahabad High Court

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के परिसर का सर्वे कराने के आदेश पर 31 मई तक लगाई रोक

Thu, 28 Apr 2022 08:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 28 Apr 2022 08:58 PM IST
सार

अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से वाराणसी की अधीनस्थ कोर्ट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाओं की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया कर रहे हैं।

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Kashi Vishwanath temple and Gyanvapi mosque dispute: Questions raised on the existence of mosque in Allahabad High Court
श्री काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को लेकर दाखिल याचिका पर मंदिर के अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी की बहस पूरी नहीं हो सकी। अब अगली सुनवाई 10 मई को होगी। कोर्ट ने अधीनस्थ अदालत के विवादित परिसर का सर्वे कराने के आदेश पर लगी रोक 31 मई तक बढ़ा दी है।

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अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से वाराणसी की अधीनस्थ कोर्ट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाओं की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया कर रहे हैं। रस्तोगी ने कहा कि संपत्ति वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत होने मात्र से उस पर गैर मुस्लिमों का अधिकार खत्म नहीं हो जाता।
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उन्होंने कहा कि 1960 के वक्फ एक्ट में 1984 में संशोधन किया गया, लेकिन वह लागू नहीं हो सका। संशोधन में वक्फ बोर्ड और गैर मुस्लिम के बीच संपत्ति विवाद की दशा में नोटिस विश्वनाथ मंदिर को जारी करना जरूरी है। मगर, वादी विपक्षी को कोई नोटिस नहीं दी गई। इस कारण भी वक्फ एक्ट इस मामले में लागू नहीं होगा।

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हाईकोर्ट में मंदिर पक्ष की ओर से रखा जा रहा पक्ष


रस्तोगी ने कहा कि 1995 का वक्फ एक्ट लागू किया गया, तो सभी वक्फ संपत्तियों का दोबारा पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया है। मगर, प्रश्नगत विवादित संपत्ति कभी भी दोबारा पंजीकृत नहीं कराई गई है। इसलिए विवादित संपत्ति को वक्फ संपत्ति नहीं माना जा सकता। रस्तोगी ने कहा कि पंजाब वक्फ बोर्ड बनाम शैम सिंह केस में कहा गया है कि विवादित जमीन वक्फ संपत्ति नहीं हो सकती।

रस्तोगी ने कहा कि 1936 में दीन मोहम्मद, मोहम्मद हुसैन और मोहम्मद जकारिया ने बनारस अधीनस्थ अदालत में घोषणात्मक वाद दायर किया था। जिसमें मौजा शहर खास, परगना देहात अमानत, बनारस गाटा 9,130 रकबा एक बीघा नौ बिस्वा 6 धुर, चबूतरा, पेड़, पक्का कुआं आदि को वक्फ संपत्ति घोषित करने और अलविदा नमाज पढ़ने की प्रार्थना की गई थी।


कोर्ट ने दावा साबित न कर पाने के कारण खारिज कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में प्रथम अपील 1937 में दाखिल की गई। जो 1942 में निर्णीत हुई। जिसमें केवल वादी को ही नमाज पढ़ने की राहत मिली थी। जिसका फायदा दूसरा कोई नहीं उठा सकता। इसलिए याचिका खारिज की जाए। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि जो भी कोर्ट आदेश करेगी, वह पालन करेंगे।

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