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करवरिया बंधुओं ने हाईकोर्ट में दाखिल की अपील
Sun, 19 Jan 2020 12:28 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 19 Jan 2020 12:28 AM IST
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jawahar pandit murder case
- फोटो : प्रयागराज
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जवाहर पंडित हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व बसपा सांसद कपिल मुनि करवरिया सहित चारों अभियुक्तों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दी है। उनकी अपील सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए कोर्ट ने जिला न्यायालय से संबंधित रिकार्ड तलब किए हैं। रिकार्ड आने के बाद सुनवाई की प्रक्रिया आरंभ होगी।
करवरिया बंधुओं को 1996 में हुए पूर्व सपा विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित की हत्या के जुर्म में जिला न्यायालय इलाहाबाद ने दोषी करार देते हुए चार नवंबर 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा कपिल मुनि के अलावा उनके भाई पूर्व भाजपा विधायक उदयभान करवरिया और सूरजभान करवरिया तथा इनके मामा रामचंद्र उर्फ कल्लू को सुनाई गई है। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। 1996 में हुई जवाहर पंडित की हत्या का मुकदमा करीब 23 साल चला। हत्याकांड की जांच में तीन बार जांच एजेंसियां बदली गई और सीबीसीआईडी की इलाहाबाद, वाराणसी और लखनऊ शाखाओं ने जांच की।
सीबीसीआईडी द्वारा चार्जशीट दाखिल करने के बाद कपिलमुनि करवरिया की याचिका पर हाईकोर्ट ने मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। 2015 में यह रोक हटने और याचिका खारिज होने के बाद तीनों भाइयों सहित चारों अभियुक्तों को जेल जाना पड़ा। सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर मुकदमे की सुनवाई 2015 से दिन प्रतिदिन के आधार पर शुरू हुई। खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए करवरिया बंधुओं ने 180 से अधिक गवाह पेश किए मगर अदालत ने उनको हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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करवरिया बंधुओं को 1996 में हुए पूर्व सपा विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित की हत्या के जुर्म में जिला न्यायालय इलाहाबाद ने दोषी करार देते हुए चार नवंबर 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा कपिल मुनि के अलावा उनके भाई पूर्व भाजपा विधायक उदयभान करवरिया और सूरजभान करवरिया तथा इनके मामा रामचंद्र उर्फ कल्लू को सुनाई गई है। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। 1996 में हुई जवाहर पंडित की हत्या का मुकदमा करीब 23 साल चला। हत्याकांड की जांच में तीन बार जांच एजेंसियां बदली गई और सीबीसीआईडी की इलाहाबाद, वाराणसी और लखनऊ शाखाओं ने जांच की।
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सीबीसीआईडी द्वारा चार्जशीट दाखिल करने के बाद कपिलमुनि करवरिया की याचिका पर हाईकोर्ट ने मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। 2015 में यह रोक हटने और याचिका खारिज होने के बाद तीनों भाइयों सहित चारों अभियुक्तों को जेल जाना पड़ा। सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर मुकदमे की सुनवाई 2015 से दिन प्रतिदिन के आधार पर शुरू हुई। खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए करवरिया बंधुओं ने 180 से अधिक गवाह पेश किए मगर अदालत ने उनको हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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