Kargil Vijay Diwas : 13 दुश्मनों को मारकर बलिदान हुए थे प्रयागराज के लालमणि यादव, सुनाई जाती है वीरगाथा
यमुनापार के करछना इलाके के पतुलकी गांव निवासी लालमणि यादव 13 कुमाऊं रेजीमेंट में नायक थे। कारगिल युद्ध में उन्होंने असाधारण और अदम्य साहस का परिचय दिया था। पाकिस्तान की से सेना के 13 दुश्मनों को मौत के घाट उतारने के बाद वह बलिदान हो गए थे।
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कारगिल विजय दिवस पर जिले में विभिन्न कार्यक्रमों और कैंडल जुलूस आदि का आयोजन किया गया है। यहां पर देश की आजादी के आंदोलन के अलावा कारगिल युद्ध में बलिदान हुए जांबांजों को याद किया गया और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। कारगिल युद्ध में जिले के करीब दो दर्जन जवानों ने हिस्सा लिया था। वह आज भी वह मंजर लोगों को सुनाते हैं। करछना के पतुलकी गांव के रहने वाले लालमणि यादव ने कारगिल युद्ध में 13 दुश्मनों को मार गिरानेन के बाद अपना सर्वोच्च बलिदान किया था। आज भी उ्नहें पूरे गर्व के साथ याद किया जाता है। हर कारगिल दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहता है। उनकी वीरता और बहादुरी के किस्से हमेशा याद किए जाते हैं।
यमुनापार के करछना इलाके के पतुलकी गांव निवासी लालमणि यादव 13 कुमाऊं रेजीमेंट में नायक थे। कारगिल युद्ध में उन्होंने असाधारण और अदम्य साहस का परिचय दिया था। पाकिस्तान की से सेना के 13 दुश्मनों को मौत के घाट उतारने के बाद वह बलिदान हो गए थे। तीन भाइयों समरजीत, कमला प्रसाद में सबसे छोटे लालमणि वर्ष 1981 में फौज में शामिल हुए थे। शहादत के समय लालमणि बतौर नायक सूबेदार थे। जिस समय उन्होंने बलिदान दिया उनकी बेटी मंजू 12 साल, अंजू 10 साल व बेटे आलोक व विवेक क्रमश: 08 व 06 वर्ष के थे।
शहादत के 14 माह पहले आए थे गांव
लालमणि अपनी सर्वोच्च शहादत के करीब 14 माह पहले गांव आए थे। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर ही तिरंगे में लिपट कर घर आया था। हर वर्ष 26 जुलाई को गांव में लालमणि यादव को श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ लगती है। लोग उनकी वीरता की गाथा सुनाते हैं।