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कभी अतीक के दाहिने हाथ थे कम्मू-जाबिर, 2015 में हुआ था अलगाव
Mon, 28 Sep 2020 11:11 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 28 Sep 2020 11:11 AM IST
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अतीक अहमद (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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बेली गांव में रहने वाले जिस कम्मू व उसके भाई जाबिर के दोमंजिला मकान पर रविवार को बुलडोजर चला, वह कभी अतीक अहमद के बेहद करीबी माने जाते थे। कहा जाता है कि 2015 में मरियाडीह दोहरे हत्याकांड में साजिशन नामजदगी होने के बाद उनके रास्ते अलग हो गए। लेकिन जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप उन पर लगते रहे और मुकदमे भी दर्ज हुए।
कम्मू-जाबिर का नाम अतीक अहमद के करीबियों में शामिल रहा। उन पर कई मुकदमे भी दर्ज हुए। हालांकि 2015 के बाद स्थितियां अचानक बदलीं। सितंबर 2015 में मरियाडीह में अल्कमा-सुरजीत हत्याकांड मेें अतीक के राइट हैंड माने जाने वाले आबिद प्रधान ने जिन सात लोगों को नामजद किया, उनमें कम्मू-जाबिर का नाम भी शामिल था। हालांकि सरकार बदलने के बाद मामले की पुनर्विवेचना कराई गई जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस ने दावा किया कि यह जघन्य हत्याकांड अतीक अहमद व उसके भाई अशरफ के इशारे पर अंजाम दिया गया।
अतीक के ही कहने पर उसके शार्प शूटर आबिद ने साजिशन फंसाने के लिए कम्मू-जाबिर की नामजदगी की। यही नहीं तत्कालीन विवेचक ने अतीक के दबाव में आकर पूर्व में नामजद किए गए सातों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की। पुनर्विवेचना के बाद पुलिस ने दावा किया था कि अतीक कम्मू-जाबिर के प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में लगातार बढ़ते प्रभाव से परेशान था। इसके अलावा अतीक के मना करने के बावजूद जाबिर विधानसभा चुनाव लडने की तैयारी में था। इसी बात से नाराज होकर दोनों को रास्ते से हटाने के लिए दोहरा हत्याकांड अंजाम दिया गया। चर्चाओं को सच माना जाए तो इस प्रकरण के बाद ही कम्मू व जाबिर ने अतीक से खुद को अलग कर लिया। लेकिन जमीन पर कब्जे व अन्य आरोप उन पर लगते रहे जिसमें मुकदमे भी दर्ज हुए।
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कम्मू-जाबिर का नाम अतीक अहमद के करीबियों में शामिल रहा। उन पर कई मुकदमे भी दर्ज हुए। हालांकि 2015 के बाद स्थितियां अचानक बदलीं। सितंबर 2015 में मरियाडीह में अल्कमा-सुरजीत हत्याकांड मेें अतीक के राइट हैंड माने जाने वाले आबिद प्रधान ने जिन सात लोगों को नामजद किया, उनमें कम्मू-जाबिर का नाम भी शामिल था। हालांकि सरकार बदलने के बाद मामले की पुनर्विवेचना कराई गई जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस ने दावा किया कि यह जघन्य हत्याकांड अतीक अहमद व उसके भाई अशरफ के इशारे पर अंजाम दिया गया।
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अतीक के ही कहने पर उसके शार्प शूटर आबिद ने साजिशन फंसाने के लिए कम्मू-जाबिर की नामजदगी की। यही नहीं तत्कालीन विवेचक ने अतीक के दबाव में आकर पूर्व में नामजद किए गए सातों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की। पुनर्विवेचना के बाद पुलिस ने दावा किया था कि अतीक कम्मू-जाबिर के प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में लगातार बढ़ते प्रभाव से परेशान था। इसके अलावा अतीक के मना करने के बावजूद जाबिर विधानसभा चुनाव लडने की तैयारी में था। इसी बात से नाराज होकर दोनों को रास्ते से हटाने के लिए दोहरा हत्याकांड अंजाम दिया गया। चर्चाओं को सच माना जाए तो इस प्रकरण के बाद ही कम्मू व जाबिर ने अतीक से खुद को अलग कर लिया। लेकिन जमीन पर कब्जे व अन्य आरोप उन पर लगते रहे जिसमें मुकदमे भी दर्ज हुए।
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