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कमलेश तिवारी हत्याकांड : सांप्रदायिक घृणा फैलाने व हत्या के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
Fri, 05 Apr 2024 05:18 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 05 Apr 2024 05:18 PM IST
सार
2016 में सोशल मीडिया पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। आरोप है कि मुफ्ती नईम काजमी व इमाम मौलाना अनवारूल हक ने अलग-अलग फतवा जारी कर कहा था कि जो अपमानजनक टिप्पणी करने वाले की हत्या करेगा उसे 51 लाख व डेढ़ करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
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कमलेश तिवारी (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांप्रदायिक घृणा फैलाने, दिनदहाड़े हत्या व षड्यंत्र के आरोपी सैयद आसिम अली की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि एक साल में ट्रायल पूरा नहीं होता तो याची वापस हाईकोर्ट आ सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है।
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2016 में सोशल मीडिया पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। आरोप है कि मुफ्ती नईम काजमी व इमाम मौलाना अनवारूल हक ने अलग-अलग फतवा जारी कर कहा था कि जो अपमानजनक टिप्पणी करने वाले की हत्या करेगा उसे 51 लाख व डेढ़ करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसके बाद शिकायतकर्ता के पति कमलेश तिवारी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिसकी एफआईआर 18 अक्तूबर 2019 को दर्ज कराई गई।
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मामले में दो नामित व दो अज्ञात पर हत्या का आरोप लगाया गया। विवेचना के बाद 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रायल लखनऊ से प्रयागराज स्थानांतरित किया गया है। अभी तक 35 गवाहों में से सात गवाहों का परीक्षण किया गया है। अन्य दो सह अभियुक्तों को हाईकोर्ट से पहले जमानत मिल चुकी है।
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बचाव पक्ष ने दलीलें दी कि याची 24 अक्टूबर 2019 से जेल में बंद हैं। चार साल पांच माह बीत चुके हैं। इस पर अभियोजन पक्ष ने कहा कि याची मुख्य आरोपी है। सांप्रदायिक घृणा फैलाना और दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करना गंभीर अपराध है। इसलिए याची जमानत पाने का हकदार नहीं हैं। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।