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पद रिक्त होने से छह माह पहले कर लिया जाए जुवेनाइल बोर्ड का चयन
Thu, 15 Oct 2020 01:30 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 15 Oct 2020 01:30 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी का गठन न होना संविधान के अनुच्छेद 15(3) एवं संयुक्त राष्ट्र संघ की बाल अधिकार संधि का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश के हर जिले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के अध्यक्ष व सदस्यों का यथा शीघ्र चयन करने का निर्देश दिया है तथा भविष्य में पद खाली होने से छ: महीने पहले ही चयन प्रक्रिया पूरी कर लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उममीद जताई है कि सरकार जुवनाइल जस्टिस एवं चाइल्ड वेलफेयर एक्ट के प्रावधानों के अनुसार अपना दायित्व निभाएगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने ईश्वरी प्रसाद तिवारी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि 11 दिसंबर 92 को भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ की बाल अधिकार संधि को स्वीकार किया। संविधान में बच्चों को समाज की रीढ़ बताते हुए राज्य को इनके अधिकारों की रक्षा करने का निर्देश दिया है। कई बार कानून में बदलाव किया गया और 2015 में जुवनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन) एक्ट 2015 लागू किया गया है, जिसके तहत हर जिले में जुवनाइल जस्टिस बोर्ड का गठन किया जाना है।
सरकार ने 14 दिसंबर 16 को हर जिले में कमेटियां गठित कीं। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियमित चयन होने तक तदर्थ व्यवस्था की गई है और पूर्व न्यायमूर्ति वीएन माथुर की अध्यक्षता में चयन कमेटी बनाई गई है। 31 जनवरी 21 तक चयन प्रक्रिया पूरी करने की जानकारी दी गई है। इससे पहले भी सरकार की तरफ से लखनऊ पीठ को जून 20 तक चयन पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन कोरोना के कारण नहीं हो सका। लखनऊ पीठ में सुनवाई जारी होने के कारण कोर्ट ने याचिका निर्देश के साथ निस्तारित कर दी है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने ईश्वरी प्रसाद तिवारी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि 11 दिसंबर 92 को भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ की बाल अधिकार संधि को स्वीकार किया। संविधान में बच्चों को समाज की रीढ़ बताते हुए राज्य को इनके अधिकारों की रक्षा करने का निर्देश दिया है। कई बार कानून में बदलाव किया गया और 2015 में जुवनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन) एक्ट 2015 लागू किया गया है, जिसके तहत हर जिले में जुवनाइल जस्टिस बोर्ड का गठन किया जाना है।
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सरकार ने 14 दिसंबर 16 को हर जिले में कमेटियां गठित कीं। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियमित चयन होने तक तदर्थ व्यवस्था की गई है और पूर्व न्यायमूर्ति वीएन माथुर की अध्यक्षता में चयन कमेटी बनाई गई है। 31 जनवरी 21 तक चयन प्रक्रिया पूरी करने की जानकारी दी गई है। इससे पहले भी सरकार की तरफ से लखनऊ पीठ को जून 20 तक चयन पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन कोरोना के कारण नहीं हो सका। लखनऊ पीठ में सुनवाई जारी होने के कारण कोर्ट ने याचिका निर्देश के साथ निस्तारित कर दी है।
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