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जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने रचा इतिहास, 13 साल में सुनाया एक लाख से अधिक फैसले
ब्यूरो, अमर उजाला, प्रयागराज
Updated Tue, 11 Dec 2018 10:15 PM IST
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न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल
राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद केस के फैसले से चर्चित इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने एक और इतिहास रचा है। वह एक लाख 12 हजार मुकदमों पर फैसला सुनाने वाले देश के पहले जज बन गए हैं। जस्टिस अग्रवाल अपने 13 वर्ष एक माह के कार्यकाल में एक लाख 12 हजार मुकदमों में निर्णय दे चुके हैं। इनमे से 10 हजार 815 केस लखनऊ पीठ के शामिल हैं। निर्णीत मुकदमों में 1788 फैसले नजीर बने, जो लॉ जर्नल्स में छापे गए हैं।
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न्यायमूर्ति अग्रवाल पांच अक्तूबर 2005 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए। उनका कार्यकाल 23 अप्रैल 2020 तक का है। 24 अप्रैल 1958 को शिकोहाबाद में जन्मे न्यायमूर्ति अग्रवाल अपने कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं।
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उपलब्धियों में शामिल हैं यह अहम फैसले
अयोध्या में रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद पर फैसला देकर चर्चा में आए जस्टिस अग्रवाल ने ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य विवाद, पूर्व प्रधानमंत्री वीपी से संबंधित डाइया ट्रस्ट विवाद एवं शंकरगढ़ की रानी के 45 गांवों के पट्टे का विवाद तय किया। साथ ही राजनैतिक दलों और संगठनों के विरोध प्रदर्शन में सरकारी और गैर सरकारी संपत्ति के नुकसान की वसूली के लिए तंत्र बनाने, प्राइमरी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए नौकरशाहों व नेताओं को अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का आदेश दिया है।
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सर्वाधिक मुकदमे तय करने वाले न्यायमूर्ति के रूप में जाने जाएंगे।
सरकारी सेवकों को सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पर ही प्रतिपूर्ति देने, विभागों में जातिगत प्रतिनिधित्व के आधार पर आरक्षण जारी रखने, कानून के विपरीत अधिसूचना से फंडामेंटल रूल्स 56में संशोधन कर सरकारी सेवकों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ा कर 60 वर्ष करने के फैसले की विधि विरुद्ध करार देने जैसे कई सुधारात्मक आदेश दिए।
न्यायमूर्ति अग्रवाल सिर्फ सिविल ही नहीं बल्कि क्रिमिनल लॉ के क्षेत्राधिकार में भी कई अहम फैसले सुना चुके हैं। जस्टिस अग्रवाल अयोध्या विवाद ही नहीं अपने कार्यकाल में सर्वाधिक मुकदमे तय करने वाले न्यायमूर्ति के रूप में जाने जाएंगे।
प्रोफाइल
- जन्म 24 अप्रैल 1958 शिकोहाबाद
- 1977 में आगरा से विज्ञान में स्नातक की डिग्री
- 1980 में मेरठ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की डिग्री
- पांच अक्तूबर 1980 को अधिवक्ता के तौर पर पंजीकृत
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में टैक्स, सिविल और इलेक्ट्रिसिटी मामलों की वकालत
- यूपी पावर कारर्पोरेशन, राजकीय निर्माण निगम, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और हाईकोर्ट के स्थायी अधिवक्ता रहे।
- नौ सितंबर 2003 को अपर महाधिवक्ता बनाए गए
- 10 अप्रैल 2004 को सीनियर एडवोकेट नामित किए गए
न्यायमूर्ति अग्रवाल सिर्फ सिविल ही नहीं बल्कि क्रिमिनल लॉ के क्षेत्राधिकार में भी कई अहम फैसले सुना चुके हैं। जस्टिस अग्रवाल अयोध्या विवाद ही नहीं अपने कार्यकाल में सर्वाधिक मुकदमे तय करने वाले न्यायमूर्ति के रूप में जाने जाएंगे।
प्रोफाइल
- जन्म 24 अप्रैल 1958 शिकोहाबाद
- 1977 में आगरा से विज्ञान में स्नातक की डिग्री
- 1980 में मेरठ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की डिग्री
- पांच अक्तूबर 1980 को अधिवक्ता के तौर पर पंजीकृत
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में टैक्स, सिविल और इलेक्ट्रिसिटी मामलों की वकालत
- यूपी पावर कारर्पोरेशन, राजकीय निर्माण निगम, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और हाईकोर्ट के स्थायी अधिवक्ता रहे।
- नौ सितंबर 2003 को अपर महाधिवक्ता बनाए गए
- 10 अप्रैल 2004 को सीनियर एडवोकेट नामित किए गए