{"_id":"6096edfd8ebc3e13ce5c8906","slug":"josh-passion-and-understanding-defeated-corona-at-the-age-of-86","type":"story","status":"publish","title_hn":"जोश, जज्बे और समझदारी से 86 साल की उम्र में कोरोना को दी मात ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जोश, जज्बे और समझदारी से 86 साल की उम्र में कोरोना को दी मात
Sun, 09 May 2021 01:31 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 09 May 2021 01:31 AM IST
सार
- कोरोना के नोडल अफसर डॉ. ऋषि सहाय के माता-पिता दोनों हो गए थे पॉजिटिव
- होम आइसोलेशन में रहकर कोविड के खिलाफ जीती जंग
विज्ञापन
prayagraj news : डॉ. वीबी सहाय और उनकी पत्नी।
- फोटो : prayagraj
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. वीबी सहाय और उनकी 85 वर्षीय पत्नी ने अपनी समझदारी, जोश और जज्बे के दम पर कोरोना को माती दे दी। दोनों होम आइसोलेशन में रहे और 14 दिन बाद संक्रमण मुक्त हो गए। दोनों कोरोना के नोडल अफसर डॉ. ऋषि सहाय के माता-पिता हैं। अब दोनों लोगों स्वस्थ्य हैं।
डॉ. वीबी सहाय ने बताया कि वह 15 अप्रैल को कोरोना से संक्रमित हुए। इसके दो-तीन दिनों बाद पत्नी रचना सहाय भी संक्रमित हो गईं। संक्रमण होने के बाद दोनों लोग होम आइसोलेशन में रहे। हिम्मत से काम लिया। घबराए बिल्कुल भी नहीं। धैर्य के साथ कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए। सही तरीके से दवाएं लीं और आज दोनों लोग संक्रमण मुक्त हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमित होने के पांचवें दिन के बाद थोड़ा सांस लेने में दिक्कत हुई। चूंकि, मेडिकल क्षेत्र से जुड़ा होने से सारी जानकारी पहले से ही थी।
लिहाजा, पल्स ऑक्सीमीटर से लगातार ऑक्सीजन की मॉनीटरिंग करते रहे। ब्लडप्रेशर, शुगर की भी लगातार जांच होती रही। संक्रमण के दौरान इन चीजों पर पूरा नियंत्रण रखा गया। वैकल्पिक तौर पर ऑक्सीजन की भी व्यवस्था थी। हालांकि, उसकी जरूरत बहुत ही मामूली पड़ी। संक्रमण के 10वें दिन बहुत राहत मिल गई और अब हम दोनों लोग स्वस्थ्य हैं। डॉ. ऋषि सहाय ने बताया कि माता-पिता के संक्रमण के दौरान भी वह अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ दोनों लोगों का पूरा ख्याल रखा। उनके माता-पिता कोरोना की जद में आने वाले सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. वीबी सहाय ने बताया कि वह 15 अप्रैल को कोरोना से संक्रमित हुए। इसके दो-तीन दिनों बाद पत्नी रचना सहाय भी संक्रमित हो गईं। संक्रमण होने के बाद दोनों लोग होम आइसोलेशन में रहे। हिम्मत से काम लिया। घबराए बिल्कुल भी नहीं। धैर्य के साथ कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए। सही तरीके से दवाएं लीं और आज दोनों लोग संक्रमण मुक्त हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमित होने के पांचवें दिन के बाद थोड़ा सांस लेने में दिक्कत हुई। चूंकि, मेडिकल क्षेत्र से जुड़ा होने से सारी जानकारी पहले से ही थी।
विज्ञापन
लिहाजा, पल्स ऑक्सीमीटर से लगातार ऑक्सीजन की मॉनीटरिंग करते रहे। ब्लडप्रेशर, शुगर की भी लगातार जांच होती रही। संक्रमण के दौरान इन चीजों पर पूरा नियंत्रण रखा गया। वैकल्पिक तौर पर ऑक्सीजन की भी व्यवस्था थी। हालांकि, उसकी जरूरत बहुत ही मामूली पड़ी। संक्रमण के 10वें दिन बहुत राहत मिल गई और अब हम दोनों लोग स्वस्थ्य हैं। डॉ. ऋषि सहाय ने बताया कि माता-पिता के संक्रमण के दौरान भी वह अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ दोनों लोगों का पूरा ख्याल रखा। उनके माता-पिता कोरोना की जद में आने वाले सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
विज्ञापन