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हाईकोर्ट ने कहा : सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना स्टांप शुल्क बढ़ाना गलत
Thu, 09 Dec 2021 08:33 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 09 Dec 2021 08:33 PM IST
सार
याची का कहना था कि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने भूमि क्रय के मामले में दाखिल खारिज होने के बाद उसके खिलाफ स्टांप शुल्क यह कहते हुए प्रत्यारोपित कर दिया गया कि एक ही खसरे की भूमि के लिए दो दरों के आधार पर स्टांप शुल्क अदा किया गया है। मामले में स्टाम्प शुल्क सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा दी गई रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है।
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- फोटो : Social Media
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना सुनवाई किए एकतरफा स्टांप शुल्क बढ़ाना और अर्थदंड लगाना गलत है। हाईकोर्ट ने मामले में रोक लगाते हुए मुरादाबाद के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को मामले में फिर से प्रत्यावेदन स्वीकार कर सुनवाई करने का आदेश दिया है। मुरादाबाद के प्रताप सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की एकल पीठ सुनवाई कर रही थी।
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याची का कहना था कि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने भूमि क्रय के मामले में दाखिल खारिज होने के बाद उसके खिलाफ स्टांप शुल्क यह कहते हुए प्रत्यारोपित कर दिया गया कि एक ही खसरे की भूमि के लिए दो दरों के आधार पर स्टांप शुल्क अदा किया गया है। मामले में स्टाम्प शुल्क सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा दी गई रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है।
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कहा गया कि इसी रिपोर्ट के आधार पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने स्टांप शुल्क बढ़ा दिया और 15 फीसदी प्रतिमाह की दर से ब्याज भी देने को कहा। याची ने अपर जिलाधिकारी के इस आदेश के खिलाफ आयुक्त मुरादाबाद के समक्ष अपील दायर की। मामले में सुनवाई कर रहे अपर आयुक्त ने अर्थ दंड के आदेश को कम कर दिया लेकिन बढ़ाए गए स्टांप शुल्क को बनाए रखा। याची ने इसी फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में गुहार लगाई है।
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याची का तर्क है कि जब भूमि के बैनामे से लेकर दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूरी हो गई है। उसके बाद अपर जिलाधिकारी की ओर से यह आदेश पारित किया गया। मामले में याची को एक बार भी अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के फैसले को एकतरफा माना और मामले में नया प्रत्यावेदन लेकर फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया है।