आदेश : अपने माता-पिता को जानने, उनसे मिलने का बच्चे का प्राकृतिक अधिकार है, मां की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
अलीगढ़ निवासी प्रियंका ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें पिता को हर महीने के एक रविवार को सार्वजनिक स्थान पर अपने बेटे से तीन घंटे के लिए मिलने की अनुमति दी गई थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट में बच्चे को साथ रखने का मामला लंबित रहने के दौरान बच्चे को अपने माता-पिता को जानने और उनसे मिलने का अधिकार है। बच्चे को पिता से मिलने से नहीं रोका जा सकता। न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति डी रमेश की कोर्ट ने प्रियंका अग्रवाल की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया।
अलीगढ़ निवासी प्रियंका ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें पिता को हर महीने के एक रविवार को सार्वजनिक स्थान पर अपने बेटे से तीन घंटे के लिए मिलने की अनुमति दी गई थी। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र की कमी से संबंधित तर्कों को खारिज कर दिया। कहा कि बच्चे का अपने माता-पिता को जानने और उनसे मिलने का प्राकृतिक अधिकार है। पारिवारिक न्यायालय की ओर से मुलाकात के अधिकार दिए जाने से बच्चे की हिरासत में कोई बदलाव नहीं आया है। ट्रायल कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान बच्चे का सर्वोत्तम हित यह है कि वह अपने पिता से मिले और उनके बारे में जाने।