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इससे अच्छा तो अंग्रेजन के जमाना रहा...
उमा मिश्रा/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 15 Aug 2015 01:26 AM IST
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इलाहाबाद। ‘इससे अच्छा तो अंग्रेजन के जमाना रहा। एक रुपया में 16 किलो गेहूं तो मिलत रहा। अब तो 16 रुपैया में एक किलो गेहूं नै आवत।’ मनमोहन पार्क चौराहे पर शुक्रवार सुबह चाय की दुकान पर बैठे बुजुर्गों के बीच स्वतंत्रता दिवस को लेकर चर्चा चल रही थी। तभी एक बुजुर्ग ने महंगाई को कोसते हुए यह बात कही। उस बुजुर्ग की यह स्पष्ट संकेत हैं कि देश की आजादी को अपनी आंखों से देखने और जश्न मनाते वक्त आजाद भारत के सुनहने भविष्य जो परिकल्पना की थी, वह अब तक पूरी नहीं हुई।
टैगोर टाउन के निवासी रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी कृष्णकांत निगम ने बताया कि देश की आजादी से पहले लोगों में सिर्फ यही भावना थी कि अब देश हमारा और कोई अंग्रेज शासन नहीं करेगा। देश को भारतवासी मिलकर संभालेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। आजाद देश में युवाबेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार के प्रति लोगों की सोच नाकारात्मक होती जा रही है। रूढ़िवादिता आज भी हावी है।
कटरा के निवासी बिजली विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी सयीद फ्रैंक वेसली का कहना है कि स्वतंत्रता के समय से लेकर अब तक के अनुशासन को देखा जाए तो बहुत बड़ा फर्क नजर आता है। कायदे- कानून जैसी चीजें अब सब खत्म होती दिखाई दे रही हैं। उस समय चोरी-डकैती जैसे मामले कभी-कभार सुनाई देते थे लेकिन अब यह रोज की बात हो गई है। अल्लापुर निवासी एवं जीआईसी की रिटायर्ड प्राध्यापिका शकुंतला शुक्ला ने शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि कहा कि आरक्षण से स्वतंत्रता खत्म होती जा रही है।
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शिक्षा जहां समान होनी चाहिए, वहां उसको लोगों ने जाति-पाति में बांट दिया है। आजाद भारत में आरक्षण लोगों को जाति के नाम पर बांट रहा है और सरकारें अंग्रेजों की तरह ‘फूट डालो, राज करो’ के रास्ते पर चलकर सत्ता पर काबिज हैं। अल्लापुर निवासी एवं रिटायर्ड प्रधानाचार्या डॉ. परमात्मा नंद पाण्डेय का कहना है कि स्वतंत्रता के बाद सामाजिक विकास जितना होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ।गरीब और गरीब, अमीर और अमीर होता जा रहा है। जातिवादी मानसिकता, रूढ़िवादिता और वर्चस्त की होड़ में सबकुछ बिखरता जा रहा है।
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टैगोर टाउन के निवासी रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी कृष्णकांत निगम ने बताया कि देश की आजादी से पहले लोगों में सिर्फ यही भावना थी कि अब देश हमारा और कोई अंग्रेज शासन नहीं करेगा। देश को भारतवासी मिलकर संभालेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। आजाद देश में युवाबेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार के प्रति लोगों की सोच नाकारात्मक होती जा रही है। रूढ़िवादिता आज भी हावी है।
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कटरा के निवासी बिजली विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी सयीद फ्रैंक वेसली का कहना है कि स्वतंत्रता के समय से लेकर अब तक के अनुशासन को देखा जाए तो बहुत बड़ा फर्क नजर आता है। कायदे- कानून जैसी चीजें अब सब खत्म होती दिखाई दे रही हैं। उस समय चोरी-डकैती जैसे मामले कभी-कभार सुनाई देते थे लेकिन अब यह रोज की बात हो गई है। अल्लापुर निवासी एवं जीआईसी की रिटायर्ड प्राध्यापिका शकुंतला शुक्ला ने शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि कहा कि आरक्षण से स्वतंत्रता खत्म होती जा रही है।
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शिक्षा जहां समान होनी चाहिए, वहां उसको लोगों ने जाति-पाति में बांट दिया है। आजाद भारत में आरक्षण लोगों को जाति के नाम पर बांट रहा है और सरकारें अंग्रेजों की तरह ‘फूट डालो, राज करो’ के रास्ते पर चलकर सत्ता पर काबिज हैं। अल्लापुर निवासी एवं रिटायर्ड प्रधानाचार्या डॉ. परमात्मा नंद पाण्डेय का कहना है कि स्वतंत्रता के बाद सामाजिक विकास जितना होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ।गरीब और गरीब, अमीर और अमीर होता जा रहा है। जातिवादी मानसिकता, रूढ़िवादिता और वर्चस्त की होड़ में सबकुछ बिखरता जा रहा है।