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खाद की कालाबाजारी में एनएसए लगाना कानून का दुरुपयोग: हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 03:19 AM IST
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Invoking NSA in fertilizer black-marketing cases is a misuse of the law: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खाद की कालाबाजारी के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत एक साल के लिए निरुद्ध चार आरोपियों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष कानून मौजूद है। ऐसे अपराध में निरुद्ध रखने की अवधि छह माह से बढ़ाकर एक साल करने के लिए एनएसए का इस्तेमाल करना कानून का दुरुपयोग है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने मोहम्मद हारून समेत चार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर दिया है। 10 मई को बुलंदशहर के अनूपशहर थाना क्षेत्र में पुलिस ने यूरिया खाद से लदे तीन ट्रकों को पकड़ा था। इनमें इफको यूरिया की 1525 बोरियां थीं। आरोप था कि खाद के परिवहन से संबंधित बिल और वाउचर नहीं थे।
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ट्रक चालकों ने कथित तौर पर बताया कि खाद मोहम्मद हारून की है। उसे खुले बाजार में अधिक कीमत पर बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। इसके बाद दर्ज आपराधिक मामले के आधार पर डीएम ने चार आरोपियों के खिलाफ एनएसए के तहत निरोध आदेश पारित किए। इसके खिलाफ दाखिल याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने डीएम के आदेश को रद्द कर दिया। संवाद
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कालाबाजारी के लिए अलग कानून
कोर्ट ने एनएसए और आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी रोकने व आपूर्ति बनाए रखने संबंधी अधिनियम के प्रावधानों पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी से जुड़े मामलों के लिए विशेष कानून बनाया गया है, जिसमें निरुद्धकरण की अधिकतम अवधि छह माह है। इसके विपरीत, एनएसए के तहत एक साल तक निरुद्ध रखने का प्रावधान है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवश्यक सेवाओं और आपूर्ति को बाधित करने वाली गतिविधियों व आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी के बीच अंतर है। कालाबाजारी के मामले में विशेष कानून के बजाय एनएसए का इस्तेमाल कर निरोध की अवधि बढ़ाना कानून की मंशा के विपरीत है। कोर्ट ने चारों बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं स्वीकार करते हुए निरोध आदेश निरस्त कर दिया।
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