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शुआट्स में 77 शिक्षकों की भर्ती में धांधली की जांच शुरू, एसआईटी ने विश्वविद्यालय पहुंचकर खंगाले अभिलेख

Thu, 09 Sep 2021 10:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 09 Sep 2021 10:36 PM IST
सार

शुआट्स में शिक्षकों की भर्ती, प्रमोशन और वेतन में वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर शासन ने एसआईटी का गठन है। बृहस्पतिवार को एसआईटी के इंस्पेक्टर आरपी सिंह और इंस्पेक्टर अजय सिंह विश्वविद्यालय पहुंचे।

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Investigation of rigging started in the recruitment of 77 teachers in Shuats, SIT reached the university and searched the records
जांच-सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सैम हिग्गिनबॉटम युनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंस ‘शुआट्स’ में 77 शिक्षकों के गलत तरीके से चयन की जांच स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) ने शुरू कर दी। बृहस्पतिवार को लखनऊ से आए दो इंस्पेक्टरों ने विश्वविद्यालय जाकर जांच शुरू की। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासनिक अफसरों से भी मुलाकात की। 
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शुआट्स में शिक्षकों की भर्ती, प्रमोशन और वेतन में वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर शासन ने एसआईटी का गठन है। बृहस्पतिवार को एसआईटी के इंस्पेक्टर आरपी सिंह और इंस्पेक्टर अजय सिंह विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने जांच शुरू की। तमाम अफसरों से मुलाकात की। टीम ने विश्वविद्यालय से भर्ती, प्रमोशन और वेतन से संबंधित फाइलें भी तलब की हैं। एसआईटी टीम के विश्वविद्यालय पहुंचने के बाद से वहां हड़कंप मच गया था।
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कोई भी अधिकारी इस बारे में कुछ भी नहीं बोल रहा था। गौरतलब है कि एसआईटी ने शुआट्स से जुड़े दो अन्य मामलों की भी जांच की थी। सिविल लाइंस व कैैंट थाने में विश्वविद्यालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज दो मुकदमों की भी जांच एसआईटी कर रही है। मार्च 2017 में बैंक प्रबंधक योगेश तिवारी ने पूर्व प्रबंधक कमाल रहमान व विवि एकाउंटेंट राजेश के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
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उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उस समय के एसपी क्राइम बृजेश मिश्रा व सीओ आलोक मिश्रा की एसआईटी गठित की गई थी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर कुलपति सहित 11 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। साथ ही मामले में बैंक के कई कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई थी। इसी तरह मृत व्यक्तियों को जीवित बताकर उनके नाम पर फर्जीवाड़ा करने का मामला उजागर हुआ था। इस मामले में उच्च न्यायालय के तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार ने कुलपति, उनके अधिवक्ता सहित चार लोगों के खिलाफ कैंट थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया था।
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