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High Court : हादसे में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों को मय ब्याज मुआवजा दे बीमा कंपनी, हाईकोर्ट का आदेश

Wed, 29 May 2024 11:01 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 29 May 2024 11:01 AM IST
सार

2016 में प्रयागराज की काटजू कॉलोनी सलोरी के रहने वाले मूलत: आंबेडकर के नेवाली दुराजपुर, जहांगीरगंज निवासी रामलौटन के बेटे उमेश (25) की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उमेश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था।

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Insurance company should give compensation with interest to the family of the youth who lost his life in the a
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

न्यायालय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने हादसे में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों की ओर से दायर वाद की सुनवाई की। बीमा कंपनी पर नौ लाख 77 हजार दो सौ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि वाद दायर होने की तिथि से साढ़े सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से एक माह में रुपये का भुगतान किया जाए।

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अधिवक्ता राकेश प्रताप सिंह ने पक्ष रखा।2016 में प्रयागराज की काटजू कॉलोनी सलोरी के रहने वाले मूलत: आंबेडकर के नेवाली दुराजपुर, जहांगीरगंज निवासी रामलौटन के बेटे उमेश (25) की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उमेश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। 26 दिसंबर 2016 की रात में वह बाइक से घर आ रहा था। रास्ते में ट्रैक्टर ने बाइक में टक्कर मार दी थी।
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अस्पताल ले जाते समय युवक ने दम तोड़ दिया था। परिजनों ने एफआईआर दर्ज कराई। साथ ही मुआवजे के लिए न्यायालय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण इलाहाबाद में वाद दायर किया। दावा अधिकरण ने बीमा कंपनी पर नौ लाख रुपये का मुआवजा लगाया है। साथ ही कहा कि बीमा कंपनी मुआवजा राशि अदा करने के बाद वाहन स्वामी से वसूल करने की अधिकारी होगी।

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न्यायाधिकरण में 10-10 साल से लंबित हैं मुकदमे
 

अधिवक्ता राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि मामले के जल्द निस्तारण के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने मई 2023 में सुनवाई के दौरान छह माह के अंदर मुकदमे का निस्तारित करने का आदेश दिया था। न्यायाधिकरण ने 14 मई 24 को आदेश जारी किया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी मुकदमे के निस्तारण में करीब एक साल लग गए। आगे उन्होंने कहा कि बिना हाईकोर्ट के आदेश के न्याधिकरण में 10-10 साल से मुकदमे चल रहे हैं। इससे अधिवक्ता और वादकारी परेशान हैं।

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