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एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती 2016ः ओएमआर शीट में गलत इंट्री करने वालों की कॉपियां जांचने का आदेश
Sun, 16 Feb 2020 01:03 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 16 Feb 2020 01:03 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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हाईकोर्ट ने एलटी ग्रेड 2016 सहायक अध्यापक नियुक्ति परीक्षा में ओएमआर शीट के दूसरे पार्ट में गलत इंट्री और मामूली त्रुटियां करने वाले अभ्यर्थियों को राहत देते हुए उनकी ओएमआर शीट जांचने का निर्देश दिया है।
इन अभ्यर्थियों ने चयनित विषयों के प्रश्नों का जवाब देने के साथ ही अन्य विषयों के कुछ प्रश्नों का भी उत्तर दे दिया था। इसकी वजह से इनकी ओएमआर शीट जांची नहीं गई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे याची यदि सफल होते हैं तो उनको साक्षात्कार में बुलाया जाए और उनका परिणाम घोषित किया जाए।
मनोज कुमार और 99 अन्य तथा दर्जनों अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने यह आदेश दिया है। याचीगण का कहना था कि वह एलटी ग्रेड परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा में दी गई ओएमआर शीट में दो हिस्से में निर्देश दिए गए थे। प्रथम हिस्से में अभ्यर्थी के बारे में सूचनाएं थीं और दूसरे में उन विषयों को चुनना था, जिनके उत्तर अभ्यर्थियों को देने हैं।
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ओएमआर शीट में यह भी निर्दे श था कि पहले हिस्से में किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर सीट का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। याचीगण ने पहले हिस्से की सभी इंट्री सही भरी।
दूसरे हिस्से में उनसे कुछ गलतियां हुईं। कुछ अभ्यर्थियों ने चयनित विषयों के अलावा अन्य विषयों में भी उत्तर दे दिए। इसी प्रकार से कुछ अन्य मामूली त्रुटियां हुईं, जिसकी वजह से उनकी ओएमआर जांची नहीं गई और परिणाम घोषित नहीं हो सका।
याचीगण का कहना था कि यदि ओएमआर शीट के पहले पार्ट में कोई गलती नहीं है तो दूसरे पार्ट में याचीगण ने प्रश्नों के सही जवाब दिए हैं। सिर्फ मामूली गलतियों के आधार पर उनका परिणाम नहीं रोका जा सकता है।
माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अधिवक्ता का कहना था कि ओएमआर शीट के निर्देशों के बावजूद गलती करने अभ्यर्थन रद्द करने का नियम है। उनकी ओर सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के कई न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया गया। कोर्ट ने दूसरे पार्ट में गलतियां करने वालों की ओएमआर शीट जांचने का निर्देश दिया है।
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इन अभ्यर्थियों ने चयनित विषयों के प्रश्नों का जवाब देने के साथ ही अन्य विषयों के कुछ प्रश्नों का भी उत्तर दे दिया था। इसकी वजह से इनकी ओएमआर शीट जांची नहीं गई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे याची यदि सफल होते हैं तो उनको साक्षात्कार में बुलाया जाए और उनका परिणाम घोषित किया जाए।
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मनोज कुमार और 99 अन्य तथा दर्जनों अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने यह आदेश दिया है। याचीगण का कहना था कि वह एलटी ग्रेड परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा में दी गई ओएमआर शीट में दो हिस्से में निर्देश दिए गए थे। प्रथम हिस्से में अभ्यर्थी के बारे में सूचनाएं थीं और दूसरे में उन विषयों को चुनना था, जिनके उत्तर अभ्यर्थियों को देने हैं।
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ओएमआर शीट में यह भी निर्दे श था कि पहले हिस्से में किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर सीट का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। याचीगण ने पहले हिस्से की सभी इंट्री सही भरी।
दूसरे हिस्से में उनसे कुछ गलतियां हुईं। कुछ अभ्यर्थियों ने चयनित विषयों के अलावा अन्य विषयों में भी उत्तर दे दिए। इसी प्रकार से कुछ अन्य मामूली त्रुटियां हुईं, जिसकी वजह से उनकी ओएमआर जांची नहीं गई और परिणाम घोषित नहीं हो सका।
याचीगण का कहना था कि यदि ओएमआर शीट के पहले पार्ट में कोई गलती नहीं है तो दूसरे पार्ट में याचीगण ने प्रश्नों के सही जवाब दिए हैं। सिर्फ मामूली गलतियों के आधार पर उनका परिणाम नहीं रोका जा सकता है।
माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अधिवक्ता का कहना था कि ओएमआर शीट के निर्देशों के बावजूद गलती करने अभ्यर्थन रद्द करने का नियम है। उनकी ओर सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के कई न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया गया। कोर्ट ने दूसरे पार्ट में गलतियां करने वालों की ओएमआर शीट जांचने का निर्देश दिया है।