फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   instructions of the government buried in front of the insolence of PWD

प्रयागराज : पीडब्ल्यूडी के पदावनत अवर अभियंताओं के खिलाफ पैरवी न करने वाले अफसरों पर कार्रवाई की संस्तुति

Fri, 29 Jul 2022 05:52 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज
अनूप ओझा, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 29 Jul 2022 05:52 AM IST
सार

नौ वर्ष पहले 2013 में सपा सरकार के दौरान समूह ग संवर्ग के 122 लिपिकों को पदोन्नति देकर जेई बनाया गया था। पदोन्नति नियमावली के तहत जेई के 95 फीसदी पदों को आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती के जरिए भरा जाना था, बाकी पांच प्रतिशत पदों पर विभागीय प्रोन्नति दी जानी थी।

विज्ञापन
instructions of the government buried in front of the insolence of PWD
प्रमोशन - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

पीडब्ल्यूडी में अमान्य दस्तावेजों के आधार पर 106 लिपिकों की अवर अभियंताओं (जेई) के रूप में हुई पदोन्नति के खेल में इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुंह की खाने के बाद शासन ने पैरवी न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। अदालती आदेश के बाद पदावनत किए गए तीन लिपिकों को बतौर जेई ज्वाइन कराने के आदेश मुख्य अभियंता ने बृहस्पतिवार को ही जारी किए हैं। इसे शासन ने अतिगंभीर माना है।

विज्ञापन



नौ वर्ष पहले 2013 में सपा सरकार के दौरान समूह ग संवर्ग के 122 लिपिकों को पदोन्नति देकर जेई बनाया गया था। पदोन्नति नियमावली के तहत जेई के 95 फीसदी पदों को आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती के जरिए भरा जाना था, बाकी पांच प्रतिशत पदों पर विभागीय प्रोन्नति दी जानी थी। लेकिन, तमाम लोग फर्जी डिप्लोमा के आधार पर इस वैतरिणी को पार कर गए।

विज्ञापन

प्रकरण की शिकायत के बाद जांच बैठी और शैक्षिक दस्तावेजों पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की राय मांगी गई तो पता लगा कि दूरस्थ शिक्षा केंद्रों के माध्यम से ली गई इंजीनियरिंग की डिग्री या डिप्लोमा मान्य ही नहीं है। इसके बाद ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) और डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (डीईबी) ने भी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से लिए गए डिप्लोमा अमान्य करार दे दिए। कार्रवाई फिर भी नहीं की गई।


 योगी सरकार की दूसरी पारी में इस मामले की फाइल तलब किए जाने से जिम्मेदार अफसरों के होश उड़े। सरकार की सख्ती के बाद शासन ने बीती 29 अप्रैल को इन्हें पदावनत कर दिया। इसके विरुद्ध 44 याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट में योजित की गईं। हालांकि, सूबे के प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष सत्यप्रकाश के निर्देश के बाद भी कोर्ट में ठीक से पैरवी नहीं की गई।

नतीजतन, कई मामलों में पदावनति आदेश पर रोक लगा दी गई। इसे शासन के उप सचिव राजेंद्र प्रसाद ने गंभीर लापरवाही मानते हुए स्टे खारिज कराने और शपथ पत्र दाखिल न करने वाले अधिशासी अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी किया है। उन्होंने मौजूदा स्थिति को गंभीर लापरवाही का द्योतक बताया है।

विज्ञापन

इसके पहले, अनु सचिव शिव कुमार ने भी प्रमुख अभियंता को भेजे पत्र में कहा है कि बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद मुख्यालय स्तर पर कोई कार्रवाई न किया जाना अत्यंत खेदजनक है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आरोप पत्र शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।


हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के क्रम में तीन पदावनत कर्मियों को अवर अभियंता के पद पर योगदान आख्या देने का आज आदेश जारी किया गया है। वे जब चाहें, ज्वाइन कर सकते हैं। - केके श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता निर्माण खंड-1, प्रयागराज।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed