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सहायक अध्यापक भर्ती के लिए एक प्रश्न के अंक देने का निर्देश
Wed, 16 Dec 2020 12:18 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 16 Dec 2020 12:18 AM IST
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कोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज को 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में शामिल अभ्यर्थी पुष्पेंद्र को एक प्रश्न का अंक देने और उसके फलस्वरूप मिलने वाले अन्य लाभ देने का निर्देश दिया है। अभ्यर्थी पुष्पेंद्र सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने आदेश दिया। याची का कहना था कि उसे बुकलेट सीरीज ए मिली थी। जिसमें प्रश्न संख्या 37 का उसका जवाब आंसर की से मिलान करने पर गलत पाया गया।
इसलिए याची को उस प्रश्न का अंक नहीं मिला। जबकि यही प्रश्न बुकलेट सीरीज सी में दसवें नंबर पर पूछा गया था। कुछ अभ्यर्थियों ने भी वही जवाब दिए जो याची ने दिया है। बाद में उन अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आंसर की में दिए जवाब को चुनौती दी थी। कोर्ट ने पाया कि याची गण का जवाब सही है और आंसर की में दिया गया उत्तर गलत है । इस आधार पर अदालत ने उक्त प्रश्न का एक अंक देने का निर्देश दिया है।
याची पुष्पेंद्र के मामले में भी वैसा ही है। इसलिए उसे भी प्रश्न संख्या 37 का अंक दिया जाए। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए परीक्षा नियामक प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि चूंकि याची द्वारा दिया गया उत्तर सही है और आंसर की का उत्तर गलत है। इसलिए याची को प्रश्न संख्या 37 का अंक दिया जाए और उसके फलस्वरूप मिलने वाले लाभ अन्य लाभ भी दिए जाए।
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इसलिए याची को उस प्रश्न का अंक नहीं मिला। जबकि यही प्रश्न बुकलेट सीरीज सी में दसवें नंबर पर पूछा गया था। कुछ अभ्यर्थियों ने भी वही जवाब दिए जो याची ने दिया है। बाद में उन अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आंसर की में दिए जवाब को चुनौती दी थी। कोर्ट ने पाया कि याची गण का जवाब सही है और आंसर की में दिया गया उत्तर गलत है । इस आधार पर अदालत ने उक्त प्रश्न का एक अंक देने का निर्देश दिया है।
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याची पुष्पेंद्र के मामले में भी वैसा ही है। इसलिए उसे भी प्रश्न संख्या 37 का अंक दिया जाए। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए परीक्षा नियामक प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि चूंकि याची द्वारा दिया गया उत्तर सही है और आंसर की का उत्तर गलत है। इसलिए याची को प्रश्न संख्या 37 का अंक दिया जाए और उसके फलस्वरूप मिलने वाले लाभ अन्य लाभ भी दिए जाए।
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