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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Instructions for checking irregularities in building construction

भवन निर्माण में अनियमितता की जांच का निर्देश

Tue, 30 Jan 2018 11:31 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
इलाहाबाद ब्यूरो Updated Tue, 30 Jan 2018 11:31 PM IST
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हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता कार्यालय भवन निर्माण में अनियमितता, फंड के उपयोग तथा सुविधाओं के अनुप्रयोगी होने के घपले की विजिलेंस जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने महानिदेशक विजिलेंस को अपनी निगरानी में गठित टीम के माध्यम से जांच कराके दो महीने में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती महानिदेश को बिना अनुमति हटाया न जाय। कोर्ट ने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को इस पर भी ध्यान देने के लिए कहा है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप न करे।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति शशिकांत की खंडपीठ ने शामली के मंशाद व अन्य की याचिका पर दिया। याचिका में अवैध खनन पर एडीएम राजस्व द्वारा जारी 104202 रुपये की रायल्टी तथा पांच गुना अर्थदंड वसूली नोटिस की वैधता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है लेकिन याचिका जांच रिपोर्ट पर विचार के लिए दो महीने बाद पेश होगी। कोर्ट ने शुरुआती दौरा में याचिका पर सरकार से जवाब मांगा था। कई बार समय दिए जाने के बावजूद जवाब न आने व सही जानकारी न देने पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव विधि को तलब कर हलफनामा मांगा।
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प्रमुख सचिव कोर्ट में हाजिर हुए और स्वीकार किया कि महाधिवक्ता कार्यालय की स्थिति ठीक नहीं है। लिफ्ट खराब है, भवन निर्माण भी दोषपूर्ण है। करोड़ाें रुपये का जनरेटर कार्य नहीं कर रहा है। अन्य सुविधाआें की कमी है। भवन निर्माण एजेंसी ने अभी तक भवन पर औपचारिक कब्जा नहीं सौंपा है। इसलिए सरकार रखरखाव का फंड नहीं दे पा रही है। कोर्ट ने कहा कि भवन निर्माण व सुविधाएं देने में भारी धनराशि खर्च की गई है। नौ मंजिले महाधिवक्ता भवन की दो लिफ्ट में से एक खराब पड़ी है। जनरेटर कभी चला ही नहीं। सुविधाओं के ठीक से काम न करने के चलते कोर्ट में सरकारी फाइलें समय से नहीं आ पा रही हैं। कोर्ट ने कहा कि गंभीर अनियमितता हुई है। संभव है फंड का सही उपयोग न हुआ हो। निर्माण में सही खर्च न होना गंभीर है। इसकी जांच जरूरी है।
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