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औपचारिकताएं निभाने के बजाए ठोस कदम उठाए इलाहाबाद विश्वविद्यालयः हाईकोर्ट

Sat, 18 May 2019 12:23 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 18 May 2019 12:23 AM IST
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Instead of taking formalities, taking concrete steps, Allahabad University: High Court
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में पाठन-पाठन का सुरक्षित वातावरण बनाने और परिसर को अपराधियों से मुक्त करने को लेकर विश्वविद्यालय और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से हाईकोर्ट नाखुश है। विश्वविद्यालय अधिकारियों की ओर से दाखिल हलफनामे पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन सुरक्षा को लेकर पूरी गंभीरता के साथ ठोस कदम उठाए, न कि बैठकें करके औपचारिकता निभाए। मीटिंग के मिनट्स देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि साफ है कि इसमें कुछ मुद्दों पर चर्चा के अलावा न कोई निर्णय लिया गया और न कोई योजना बनी है।
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पीसीबी छात्रावास में पूर्व छात्र रोहित शुक्ला की हत्या के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका कायम की है। हाईकोर्ट ने पुलिस और जिला प्रशासन तथा विश्वविद्यालय के अधिकारियों को तलब कर परिसर को अपराध मुक्त रखने के लिए कदम उठाने का आदेश दिया था। मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की पीठ ने लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट सुप्रीमकोर्ट द्वारा नियमावली बनाने के आदेश के अनुपालन की जानकारी मांगी। विश्वविद्यालय के हलफनामे से पता चला कि इसे लेकर हुई बैठक में कुछ मुद्दों पर चर्चा हुई, मगर कोई निर्णय नहीं हो सका है।
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विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला कोर्ट में हाजिर थे। अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी और एजीए सैय्यद अली मुर्तजा ने कहा कि घटना के बाद अभियान चलाकर 13 छात्रावासों के 407 कमरे सील कर दिए गए हैं। इनकी मरम्मत का काम चल रहा है। कुछ कारणों से मरम्मत का काम पूरा नहीं हो सका है, मगर जल्दी ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। एसएसएल छात्रावास पुरा छात्र चेरिटेबिल एसोसिएशन की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि सोसाइटी विश्वविद्यालय को किताबें और अन्य सुविधाएं देती है, मगर उनका रखरखाव नहीं होता है।
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सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय ने छात्रावासों को समय से खाली करा पाने में नाकामी का जिम्मेदार जिला प्रशासन को ठहराया। कोर्ट को बताया कि प्रशासन की ओर से बहुत सीमित सहायता उपलब्ध हो पाने के कारण वह छात्रावास खाली नहीं करा पाते हैं। कोर्ट ने उम्मीद जाहिर की भविष्य में प्रशासन छात्रावास खाली कराने में पूरा सहयोग करेगा।


कोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से छात्रावासों के रखरखाव हेतु मिले बजट और खर्च की गई धनराशि का ब्यौरा भी अगली सुनवाई पर पेश करने के लिए कहा है। इसके अलावा छात्रावासों, पुस्तकालयों, बाथरूम आदि जरूरतों की जानकारी देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिका की अगली सुनवाई पांच जुलाई को विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन को प्रगति रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। 
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