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इंक्वायरी, चार्जशीट के बिना मिलेगी सजा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 02 Sep 2016 02:55 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद। इंक्रीमेंट के मामले में गुड-वेरी गुड के चक्कर ने केंद्रीय कर्मचारियों को परेशान कर रखा है। सातवें वेतन आयोग के तहत सरकार ने इंक्रीमेंट की शर्तें कुछ इस तरह से लागू कर दी हैं, जो सीसीएस कंडक्ट रूल के खिलाफ मानी जा रही हैं। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी को अगर वेरी गुड नहीं मिला तो उसका इंक्रीमेंट रोक जाएगा जबकि सीसीएस कंडक्ट रूल में इसे बड़ी सजा माना जाता है। इसके लिए इंक्वायरी एवं चार्जशीट की प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी है।
सातवें वेतन आयोग के तहत व्यवस्था लागू की गई है कि नौकरी के शुरुआती 20 वर्षों में उन्हीं कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का लाभ मिलेगा, जिन्हें वेरी गुड की मार्किंग की जा रही है। अगर कामकाज पर वेरीगुड नहीं मिलता है तो कर्मचारी का इंक्रीमेंट रोक लिया जाएगा। आल इंडिया ऑडिट एंड एकाउंट एसोसिएशन के पूर्व सहायक महासचिव हरिशंकर तिवारी का कहना है कि सीसीएस कंडक्ट रूल के तहत अगर संचयी प्रभाव से किसी कर्मचारी का इंक्रीमेंट रोका जाता है तो उससे पहले इंक्वायरी और चार्जशीट की प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी है। सातवें वेतन आयोग में बिना किसी इंक्वायरी और चार्जशीट के वेतन वृद्धि रोकने की व्यवस्था कर दी गई है। वेरी गुड नहीं मिला तो कर्मचारी का इंक्रीमेंट रोक दिया जाएगा। यह सीसीएस कंडक्ट रूल के खिलाफ है और सातवें वेतन आयोग की विसंगति है। इससे सिर्फ कर्मचारियों का नुकसान होगा। यह पूरी तरह से गलत है।
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सातवें वेतन आयोग के तहत व्यवस्था लागू की गई है कि नौकरी के शुरुआती 20 वर्षों में उन्हीं कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का लाभ मिलेगा, जिन्हें वेरी गुड की मार्किंग की जा रही है। अगर कामकाज पर वेरीगुड नहीं मिलता है तो कर्मचारी का इंक्रीमेंट रोक लिया जाएगा। आल इंडिया ऑडिट एंड एकाउंट एसोसिएशन के पूर्व सहायक महासचिव हरिशंकर तिवारी का कहना है कि सीसीएस कंडक्ट रूल के तहत अगर संचयी प्रभाव से किसी कर्मचारी का इंक्रीमेंट रोका जाता है तो उससे पहले इंक्वायरी और चार्जशीट की प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी है। सातवें वेतन आयोग में बिना किसी इंक्वायरी और चार्जशीट के वेतन वृद्धि रोकने की व्यवस्था कर दी गई है। वेरी गुड नहीं मिला तो कर्मचारी का इंक्रीमेंट रोक दिया जाएगा। यह सीसीएस कंडक्ट रूल के खिलाफ है और सातवें वेतन आयोग की विसंगति है। इससे सिर्फ कर्मचारियों का नुकसान होगा। यह पूरी तरह से गलत है।
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