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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Informing the accused of the right to have a lawyer present during interrogation is mandatory.

हाईकोर्ट : पूछताछ के दौरान आरोपी को वकील रखने के अधिकार की जानकारी देना अनिवार्य

Thu, 08 Oct 2026 06:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 08 Oct 2026 06:42 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस को किसी संदिग्ध या आरोपी को पूछताछ के लिए थाने लाने पर उसके पसंद के अधिवक्ता को पूछताछ के दौरान मौजूद रखने के अधिकार की जानकारी देना अनिवार्य है।

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Informing the accused of the right to have a lawyer present during interrogation is mandatory.
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस को किसी संदिग्ध या आरोपी को पूछताछ के लिए थाने लाने पर उसके पसंद के अधिवक्ता को पूछताछ के दौरान मौजूद रखने के अधिकार की जानकारी देना अनिवार्य है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन व न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने रवि चौरसिया और अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है।

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प्रयागराज निवासी याची के खिलाफ सोरांव थाने में विभिन्न आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। याची ने अवैध रूप से गिरफ्तार करने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याची को पुलिस ने 15 सितंबर 2026 को थाने में हिरासत में लिया था लेकिन उसकी औपचारिक गिरफ्तारी अगले दिन 16 सितंबर को सुबह 10:45 बजे दिखाई गई। पुलिस ने जीडी में हिरासत दर्ज नहीं करने को अनजाने में हुई गलती बताया लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किए बिना घंटों पूछताछ करने के बाद में आरोपी नहीं बना सकती। इस मामले में याची को 24 घंटे से अधिक समय तक मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे अवैध हिरासत माना। कोर्ट ने कहा कि बाद में की गई औपचारिक गिरफ्तारी से शुरुआती अवैध हिरासत वैध नहीं हो जाती।
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कोर्ट ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 38 में यह प्रावधान है कि गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील से मिलने का अधिकार है, हालांकि पूरी पूछताछ के दौरान नहीं। इसके साथ ही कोर्ट ने याची को रिहा करने और अवैध हिरासत के लिए 30 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसकी वसूली जिम्मेदारों से करने का निर्देश दिया है।

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