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नोटिस मामले में हमजा, इविवि प्रशासन आमने-सामने
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:33 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष अदील हमजा साहिल पर परिसर में धरना-प्रदर्शन, अराजकता फैलाने, मुख्यमंत्री के पुतले की शवयात्रा निकालकर पुतला दहन करने के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करना और उनके 15 अगस्त तक परिसर में प्रवेश पर पाबंदी लगाने की चेतावनी का मामला तूल पकड़ने लगा है। उपाध्यक्ष ने इस मामले में चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरएस दुबे को ही कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया है। बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से बातचीत में हमजा ने इविवि प्रशासन पर छात्र आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया। कहा कि उनका निलंबन और प्रवेश पर प्रतिबंध तानाशाहीपूर्ण है।
हमजा का कहना है कि छात्र आंदोलन में प्रजातांत्रिक रूप से सहयोग करना उनका दायित्व है। चीफ प्रॉक्टर ने 31 मई और 14 जून को नोटिस जारी किया। पहले नोटिस में कहा गया है कि पूर्व में भी अनुशासनहीनता करने वाले छात्र के रूप में आपको चिह्नित किया जा चुका है। हमजा ने स्पष्ट किया कि उन्हें आज तक कभी कोई नोटिस नहीं दिया गया और जिन छात्रों को नोटिस दिया गया, उसे उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया या फिर इविवि ने स्वत: वापस ले लिया। मुझे कोई नोटिस नहीं दिया गया और मांगने पर आज तक कोई जवाब भी नहीं दिया गया।
दूसरे नोटिस में सीएम के पुतले की शव यात्रा निकालने और पुतला दहन को भी हमजा ने गलत बताया। इस मामले में उन्होंने विवि प्रशासन को ही कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया। कहा कि क्या सिर्फ एक व्यक्ति शव यात्रा निकाल सकता है, अन्य किसी को भी इस संबंध में नोटिस जारी नहीं हुआ। नोटिस में यह भी कहा गया कि सीएम एक पवित्र मंदिर के धर्माचार्य हैं। हमजा ने संविधान का हवाला देते हुए इस मामले में धार्मिक आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चीफ प्रॉक्टर को 48 घंटे का नोटिस दिया गया है। यदि उन्होंने इस मामले में समुचित उत्तर न दिया तो मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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हमजा का कहना है कि छात्र आंदोलन में प्रजातांत्रिक रूप से सहयोग करना उनका दायित्व है। चीफ प्रॉक्टर ने 31 मई और 14 जून को नोटिस जारी किया। पहले नोटिस में कहा गया है कि पूर्व में भी अनुशासनहीनता करने वाले छात्र के रूप में आपको चिह्नित किया जा चुका है। हमजा ने स्पष्ट किया कि उन्हें आज तक कभी कोई नोटिस नहीं दिया गया और जिन छात्रों को नोटिस दिया गया, उसे उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया या फिर इविवि ने स्वत: वापस ले लिया। मुझे कोई नोटिस नहीं दिया गया और मांगने पर आज तक कोई जवाब भी नहीं दिया गया।
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दूसरे नोटिस में सीएम के पुतले की शव यात्रा निकालने और पुतला दहन को भी हमजा ने गलत बताया। इस मामले में उन्होंने विवि प्रशासन को ही कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया। कहा कि क्या सिर्फ एक व्यक्ति शव यात्रा निकाल सकता है, अन्य किसी को भी इस संबंध में नोटिस जारी नहीं हुआ। नोटिस में यह भी कहा गया कि सीएम एक पवित्र मंदिर के धर्माचार्य हैं। हमजा ने संविधान का हवाला देते हुए इस मामले में धार्मिक आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चीफ प्रॉक्टर को 48 घंटे का नोटिस दिया गया है। यदि उन्होंने इस मामले में समुचित उत्तर न दिया तो मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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