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नगर निगम में चालकों की भर्ती में घोटाला
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 16 Feb 2015 11:16 PM IST
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नगर निगम में वाहन चालकों की नियुक्ति और डीजल खर्च में लाखों का घोटाला सामने आया है। हाईकोर्ट द्वारा इस मामले में संज्ञान लेने के बाद नगर निगम अफसरों के हाथ पांव फूल गए हैं। कोर्ट की फटकार केबाद नगर आयुक्त ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नगर आयुक्त अदालत में हलफनामा दाखिल कर मामले की जानकारी देंगे।
नगर निगम को ठेके पर वाहन चालक उपलब्ध कराने के लिए अनुबंधित कंपनी ज्योति ट्रेवेल्स एजेंसी एंड कांस्ट्रेक्टर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चालकों की भर्ती और भुगतान में गड़बड़ी का आरोप लगाया। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति हर्ष कुमार की खंडपीठ ने नगर आयुक्त चालकों की कुल संख्या, उनके ड्राइविंग लाइसेंस, डीजल और पेट्रोल खर्च का ब्यौरा तलब कर लिया। निगम द्वारा प्रस्तुत ड्राइविंग लाइसेंस को कोर्ट ने सत्यापन के लिए आरटीओ कार्यालय भेज कर आरटीओ से रिपोर्ट मांग ली है।
नगर निगम द्वारा प्रस्तुत लॉग बुक में खंडपीठ ने बड़ी गड़बड़ी पकड़ी है। प्रथम दृष्टया पूरी लॉग बुक एक ही दिन में तैयार की गई लगती है। कोर्ट ने इसकी जांच के निर्देश दिए हैं। यह भी पूछा है कि किन अधिकारियों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि निगम के पास कितने कार्यरत वाहन हैं और कितने खड़े हैं। जनवरी में खर्च किए गए डीजल और पेट्रोल की जानकारी तथा लॉग बुक में दिखाए गए खर्च की भी जांच करने का निर्देश दिया है।
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याची कंपनी का कहना है कि उसने जितने वाहन चालक निगम को उपलब्ध कराए उसके एवज में उसे तीन लाख रुपये के लगभग भुगतान किया गया जबकि नए ठेके में नगर निगम का चालकों पर अनुमानित खर्च 13 लाख रुपये के लगभग हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जब निगम के पास स्वयं के वाहन चालक हैं तो उसे बाहर से चालक लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
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नगर निगम को ठेके पर वाहन चालक उपलब्ध कराने के लिए अनुबंधित कंपनी ज्योति ट्रेवेल्स एजेंसी एंड कांस्ट्रेक्टर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चालकों की भर्ती और भुगतान में गड़बड़ी का आरोप लगाया। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति हर्ष कुमार की खंडपीठ ने नगर आयुक्त चालकों की कुल संख्या, उनके ड्राइविंग लाइसेंस, डीजल और पेट्रोल खर्च का ब्यौरा तलब कर लिया। निगम द्वारा प्रस्तुत ड्राइविंग लाइसेंस को कोर्ट ने सत्यापन के लिए आरटीओ कार्यालय भेज कर आरटीओ से रिपोर्ट मांग ली है।
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नगर निगम द्वारा प्रस्तुत लॉग बुक में खंडपीठ ने बड़ी गड़बड़ी पकड़ी है। प्रथम दृष्टया पूरी लॉग बुक एक ही दिन में तैयार की गई लगती है। कोर्ट ने इसकी जांच के निर्देश दिए हैं। यह भी पूछा है कि किन अधिकारियों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि निगम के पास कितने कार्यरत वाहन हैं और कितने खड़े हैं। जनवरी में खर्च किए गए डीजल और पेट्रोल की जानकारी तथा लॉग बुक में दिखाए गए खर्च की भी जांच करने का निर्देश दिया है।
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याची कंपनी का कहना है कि उसने जितने वाहन चालक निगम को उपलब्ध कराए उसके एवज में उसे तीन लाख रुपये के लगभग भुगतान किया गया जबकि नए ठेके में नगर निगम का चालकों पर अनुमानित खर्च 13 लाख रुपये के लगभग हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जब निगम के पास स्वयं के वाहन चालक हैं तो उसे बाहर से चालक लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी।