अभद्र टिप्पणी करने के मामले में नसीमुद्दीन को राहत, हाईकोर्ट ने रद्द किया संज्ञान लेने का आदेश
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महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में हाईकोर्ट और स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए से पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी को राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने उनके सहित अन्य अभियुक्तों के खिलाफ पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेने का पॉक्सो एक्ट जज लखनऊ का आदेश रद्द कर दिया है। हालांकि हाईकोर्ट ने अवर न्यायालय को नए सिरे से आदेश जारी करने की छूट दी है।
इस आदेश के मद्देनजर स्पेशल कोर्ट जज पवन कुमार तिवारी ने नसीमुद्दीन को जारी तलबी वारंट भी वापस ले लिया है। नसीमुद्दीन पर लखनऊ में बसपा द्वारा आयोजित एक जनसभा और प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और नाबालिग लड़की पर अभद्र टिप्पणी करने का मुकदमा पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज है। इसमें नसीमउद्दीन के अलावा राम अचल राजभर, मेवालाल गौतम, नौशाद अली और अतर सिंह राव के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है।
चार्जशीट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कहा गया कि अपर जिला जज प्रथम लखनऊ ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने का प्रोफार्मा भरते समय मात्र खानापूर्ति की है। उन्होंने बिना अपने विवेक का प्रयोग किए रूटीन तरीके से प्रोफार्मा भर दिया जबकि नियमानुसार चार्जशीट के तथ्यों पर विचार करने के बाद ही मुकदमे पर संज्ञान लिया जा सकता है। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने याचिका पर सुनवाई करते हुए संज्ञान लेने का आदेश रद्द कर दिया है।
स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए ने इस मामले में नसीमुद्दीन सहित अन्य अभियुक्तों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। सोमवार को हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी अधिवक्ता डीआर चौधरी और जगदीश त्रिपाठी और मनीष खन्ना ने स्पेशल कोर्ट दी। इसके बाद स्पेशल कोर्ट ने गैरजमानती वारंट का आदेश वापस ले लिया है। इस प्रकरण की सुनवाई 25 फरवरी को होगी।