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एपीएस-2010 में फर्जीवाड़ा, छह का चयन निरस्त

Tue, 25 Dec 2018 02:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 25 Dec 2018 02:14 AM IST
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In absconding APS-2010, six were canceled
UPPSC
अपर निजी सचिव (एपीएस)-2010 की भर्ती में हुई धांधली आखिर खुलकर सामने आ गई। बिना कंप्यूटर अर्हता के चार अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया और दो अन्य अभ्यर्थियों ने अपने अभिलेखों का सत्यापन तक नहीं कराया। इसके बावजूद उन्हें नौकरी दी गई। मामले में हाईकोर्ट ने जांच के आदेश दिए तो गड़बड़ी सामने आ गई। जांच कराने के बाद आयोग ने अब इन छह अभ्यर्थियों का चयन निरस्त करते हुए रिक्त पदों पर छह नए अभ्यर्थियों को नियुक्ति करने की संस्तुति की है। इस भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी की सीबीआई की भी पैनी नजर है।
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एपीएस-2010 के तहत आयोग ने अपर निजी सचिव के 250 पदों पर भर्ती के लिए तीन अक्तूबर 2017 को अंतिम चयन परिणाम घोषित किया था और चयनित अभ्यर्थियों की संस्तुतियां 16 नवंबर 2017 को शासन को उपलब्ध करा दी गईं थीं। अभ्यर्थियों ने परीक्षा में धांधली का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट ने 18 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए थे। आयोग ने सभी 18 अभ्यर्थियों की जांच कराई और पाया कि चार अभ्यर्थी कंप्यूटर अर्हता धारित नहीं करते हैं और दो अन्य अभ्यर्थियों ने अपने अभिलेखों का सत्यापन ही नहीं कराया था। इसके बावजूद इनका चयन कर लिया गया।
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अब इन छह अभ्यर्थियों का चयन निरस्त करते हुए आयोग ने रिक्त पदों पर अभ्यर्थी प्रतिभा निगम, श्वेता, शोभना त्रिपाठी, मनोज कुमार वर्मा, रनधीर कुमार और भूपेंद्र प्रताप सिंह का चयन किया है। इस बाबत आयोग के सचिव जगदीश ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। यूपीपीएससी की परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई की एपीएस-2010 पर भी पैनी नजर है। सीबीआई को भी शुरुआती जांच में इस बात के सुबूत मिले थे कि कई अभ्यर्थियों से ट्रिपल-सी अभिलेख परीक्षा के बाद लिए गए और कंप्यूटर संबंधी ये अभिलेख फर्जी थे। तकनीकी कारणों से सीबीआई इस परीक्षा की जांच नहीं कर पा रही थी। इसी वजह से सीबीआई ने इस परीक्षा के जांच के लिए अलग से अनुमति मांगी थी।
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एपीएस-2010 में जिन छह अभ्यर्थियों का गलत तरीके से चयन हुआ, आयोग ने उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया है। आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति में केवल उन छह अभ्यर्थियों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं, जिनका चयन रिक्त पदों पर हुआ है जबकि अन्य परीक्षाओं के मामले में ऐसा नहीं होता है। आयोग उन अभ्यर्थियों के नाम भी सार्वजनिक करता है, जिनका अभ्यर्थन निरस्त किया जाता है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने उन चयनितों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की है, जिनके अभ्यर्थन निरस्त किए गए हैं। अवनीश का दावा है कि ये छह नाम शासन और आयोग के उन अफसरों के करीबी रिश्तेदारों के हैं, जिन पर चयन में भाई-भतीजावाद के आरोप लग रहे हैं।


एपीसीएस-2010 में जब धांधली के आरोप लगे तो अभ्यर्थियों का यही कहना था कि इस परीक्षा के तहत आयोग और शासन स्तर के कई अफसरों के नाते-रिश्तेदारों का अपर निजी सचिव पद पर चयन किया गया। सीबीआई को भी शुरुआती जांच में इस बात के सुराग मिले थे और इसी वजह से सीबीआई ने इस परीक्षा की जांच के लिए अलग से अनुमति मांगी थी। उस वक्त सीबीआई जांच का नेतृत्व कर रहे आईपीएस अफसर राजीव रंजन को इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। शुरुआत में इस परीक्षा की सीबीआई जांच को दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद शासन को जांच के लिए सीबीआई को मंजूरी देनी पड़ी। हालांकि, राजीव रंजन को आयोग की परीक्षाओं की सीबीआई जांच से अलग किया जा चुका है।
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