हाईकोर्ट का अहम फैसला : कर्मचारी के बकाये की वसूली न तो आश्रित से हो सकती है, न ग्रेच्युटी से
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि आश्रित से मृतक कर्मचारी के किसी भी बकाए की वसूली नहीं की जा सकती। कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग द्वारा पारित वसूली आदेश को रद्द करते हुए मृतक कर्मचारी की समस्त सेवानिवृति लाभों सहित ग्रेच्युटी की पूरी धनराशि का भुगतान तीस दिन में याची को करने का आदेश दिया है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक कर्मचारी के बकाए की वसूली न तो आश्रित से की जा सकती है और न ही सेवानिवृति लाभों सहित ग्रेच्युटी की धनराशि से। सेवानिवृति लाभों सहित ग्रेच्युटी प्राप्त करना उसका अधिकार है, उसकी मृत्यु की दशा में आश्रित उस धनराशि को प्राप्त करने का अधिकारी है। यह आदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने याची मोहम्मद शमीम द्वारा लोक निर्माण विभाग द्वारा मृतक पिता की सेवानिवृतिक लाभों से सेवाकाल के बकाये की वसूली आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।
याची के अधिवक्ता प्रभाकर सिन्हा का कहना था कि याची के पिता लोक निर्माण विभाग कानपुर नगर में दैनिक वेतन पर बेलदार के पद पर कार्यरत थे, 2010 में उनकी सेवाएं नियमित हो गई। इससे पहले याची के पिता को न्यूनतम वेतन स्कीम के तहत दो लाख छह हजार छह सौ छप्पन रुपये विभाग द्वारा एक लंबित याचिका में पारित अंतरित आदेश के अनुपालन ने प्रदान किए गए थे।
सेवाकाल के दौरान उनकी मृत्यु होने पर याची की आश्रित कोटे से मेट के पद पर नियुक्ति हो गई। जिसके बाद याची ने पिता के सेवानिवृति लाभों सहित ग्रेच्युटी की पूरी धनराशि प्रदान करने का प्रार्थना पत्र दिया था। विभाग ने सेवानिवृति लाभ से न्यूनतम वेतन स्कीम के तहत दो लाख छह हजार छह सौ छप्पन रुपये विभाग द्वारा पिता को दिए गए रूपए की वसूली करते हुए शेष धनराशि प्रदान करने का आदेश पारित किया था। विभाग द्वारा पारित वसूली आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि आश्रित से मृतक कर्मचारी के किसी भी बकाए की वसूली नहीं की जा सकती। कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग द्वारा पारित वसूली आदेश को रद्द करते हुए मृतक कर्मचारी की समस्त सेवानिवृति लाभों सहित ग्रेच्युटी की पूरी धनराशि का भुगतान तीस दिन में याची को करने का आदेश दिया है।