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गोरखपुर के सुमेर सागर तालाब से हटेगा अवैध कब्जा

Mon, 24 Aug 2020 07:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 24 Aug 2020 07:48 PM IST
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Illegal possession will be removed from Sumer Sagar pond of Gorakhpur
court - फोटो : prayagraj
गोरखपुर जैतपुर एरिया के सुमेर सागर तालाब से अवैध कब्जा हटाने में अब कोई बाधा नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कब्जा हटाने की कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका निराधार पाते हुए खारिज कर दी है। जिलाधिकरी गोरखपुर ने  2006 में  सुप्रीम कोर्ट के हिंचलाल तिवारी केस में दिए गए निर्णय के आधार पर अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिया था।
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इस कार्यवाही के खिलाफ पक्षकारों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सार्वजनिक उपयोग के तालाब भूमि से अवैध कब्जा हटाने की कार्यवाही करना  जिलाधिकारी का दायित्व है।भले ही भूमि प्राइवेट लोगों के नाम दर्ज है।  जिस तरह से जिलाधिकारी के आदेश मे सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है, याची को राहत देने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने याची से कहा है कि वह चाहे तो न्यायालय मे अपने स्वामित्व की घोषणा का दावा कर सकताहै।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने अवधेश कुमार श्रीवास्तव की याचिका पर दिया है । 
 जिलाधिकारी गोरखपुर ने एक कमेटी गठित कर सुमेर सागर तालाब से अवैध कब्जा हटाने की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। कमेटी ने छह अप्रैल 2006 को रिपोर्ट दी ।जिसके आधार पर जिलाधिकारी ने 15अप्रैल 2006 को तालाब भूमि पर प्राइवेट लोगों के दर्ज नाम को अवैध करार दिया और अवैध कब्जा खाली कराने का निर्देश दिया। 
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याची का कहना था कि 22एकड़ भूमि मे केवल पांच एकड़ भूमि ही नजूल है।यह उसकी जमींदारी रही है। जिलाधिकारी का आदेश एकपक्षीय है।उसे ध्वस्तीकरण आदेश जारी करने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। वैसे भी हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर ध्वस्तीकरण पर रोक लगा रखी है। ऐसे में आदेश पारित होने के 14साल बाद ध्वस्तीकरण कार्यवाई रोकी जाए।कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि कार्यवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा,रही है।
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