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कैंसर को प्रारंभिक चरण में पहचाना
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 09 Dec 2014 12:39 AM IST
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केरल के पायननूर से 2005 में तीसरी कक्षा तक की पढ़ाई पूरी करके मां प्रीमा कुमार और पिता प्रवीण कुमार के साथ इंग्लैंड पहुंची नन्हीं बच्चियां अमीता कुमार एवं अनीता कुमार ने 2014 का यूके का यंग साइंटिस्ट एवार्ड जीता है। मेडिकल की पढ़ाई कर रही इन छात्राओं ने कैंसर को प्रारंभिक स्तर पर पहचान करने की दिशा में सफलता हासिल की है।
आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के दौरान आरंभिक सफलता में इन जुड़वा बहनों ने कैंसर की पहचान के लिए मॉडल तैयार किया है। अपने शोध को इन छात्राओं ने जर्नल में प्रकाशित करने के लिए भेजा है। जुड़वा बहनों ने चूहे पर आरंभिक स्तर पर अपना प्रयोग करके सफलता हासिल की है।
यह जुड़वा बहने ट्रिपलआईटी विज्ञान समागम में भाग लेने अपनी मां प्रीमा कुमार के साथ आई हैं। इनका कहना है कि वह आगे क्लीनिकल मेडिसिन के क्षेत्र में शोध के लिए साउथम्टन यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेंगी। उन्होंने कहा कि औसत आयु बढ़ने के कारण विश्व में वृद्धों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए आगे वह कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से बूढ़ों को होने वाली डिमेंसिया बीमारी पर काम करने की सोच रही हैं। जुड़वा बहने अमीता-अनीता के साथ उनकी मां प्रीमा का कहना है कि विदेश में रहने के बाद भी उनका मन हमेशा अपने इंडिया के लिए लगा रहता है। वह पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत के लोगों के लिए काम करना चाहती है। वह इंसपायर में भाग लेने आए स्कूली बच्चों से विज्ञान के क्षेत्र में शोध करने की अपील करती हैं।
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आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के दौरान आरंभिक सफलता में इन जुड़वा बहनों ने कैंसर की पहचान के लिए मॉडल तैयार किया है। अपने शोध को इन छात्राओं ने जर्नल में प्रकाशित करने के लिए भेजा है। जुड़वा बहनों ने चूहे पर आरंभिक स्तर पर अपना प्रयोग करके सफलता हासिल की है।
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यह जुड़वा बहने ट्रिपलआईटी विज्ञान समागम में भाग लेने अपनी मां प्रीमा कुमार के साथ आई हैं। इनका कहना है कि वह आगे क्लीनिकल मेडिसिन के क्षेत्र में शोध के लिए साउथम्टन यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेंगी। उन्होंने कहा कि औसत आयु बढ़ने के कारण विश्व में वृद्धों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए आगे वह कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से बूढ़ों को होने वाली डिमेंसिया बीमारी पर काम करने की सोच रही हैं। जुड़वा बहने अमीता-अनीता के साथ उनकी मां प्रीमा का कहना है कि विदेश में रहने के बाद भी उनका मन हमेशा अपने इंडिया के लिए लगा रहता है। वह पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत के लोगों के लिए काम करना चाहती है। वह इंसपायर में भाग लेने आए स्कूली बच्चों से विज्ञान के क्षेत्र में शोध करने की अपील करती हैं।
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