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मंगल पर है जीवन की संभावना
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 09 Dec 2014 12:33 AM IST
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24 सितंबर को मगलयान के सफल प्रक्षेपण के बाद मंगल ग्रह के बारे में मिली जानकारी के बाद वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि इस ग्रह पर पानी की संभावना नहीं के बराबर है। मंगल ग्रह पर 1.3 फीसदी आक्सीजन एवं 95 फीसदी कार्बन डाईआक्साइड होने के बाद भी वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि कार्बन डाइआक्साइड से आक्सीजन को अलग करके जीवन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ट्रिपलआईटी में विज्ञान समागम में भाग लेने आए इसरो के साइंटिस्ट डॉ. नागराजन वेदाचलम ने यह जानकारी दी।
उन्होंने मंगलयान की सफल यात्रा के बारे में बताया कि इस अभियान में 39 महीने का समय लगा, उन्होंने बताया इस प्रकार के अभियान की सफलता के लिए गणितीय आकलन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि भारत ने कम पैसे में अपने मिशन को पूरा करके पूरे विश्व के सामने उदाहरण पेश किया है।
मंगलयान मिशन में शामिल वैज्ञानिक ने बताया कि लक्ष्य पूरा होने के 300 किमी पहले यान के फ्यूल टैंक में आग लग गई, इसके बाद अभियान में शामिल सभी वैज्ञानिक चिंता में पड़ गए, इसके चंद सेकेंड के अंतर पर यह आग बुझ गई और वैज्ञानिकों में आई सनसनी दूर हो गई। मंगल मिशन की पूरी यात्रा को डॉ. वेदाचलम ने विज्ञान समागम में आए वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं से साझा की।
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उन्होंने मंगलयान की सफल यात्रा के बारे में बताया कि इस अभियान में 39 महीने का समय लगा, उन्होंने बताया इस प्रकार के अभियान की सफलता के लिए गणितीय आकलन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि भारत ने कम पैसे में अपने मिशन को पूरा करके पूरे विश्व के सामने उदाहरण पेश किया है।
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मंगलयान मिशन में शामिल वैज्ञानिक ने बताया कि लक्ष्य पूरा होने के 300 किमी पहले यान के फ्यूल टैंक में आग लग गई, इसके बाद अभियान में शामिल सभी वैज्ञानिक चिंता में पड़ गए, इसके चंद सेकेंड के अंतर पर यह आग बुझ गई और वैज्ञानिकों में आई सनसनी दूर हो गई। मंगल मिशन की पूरी यात्रा को डॉ. वेदाचलम ने विज्ञान समागम में आए वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं से साझा की।
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