इफको फूलपुर हादसा : प्लांट ठप होने से चार दिन में 88 मिट्रिक टन घटा यूरिया का उत्पादन
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इफ्को फूलपुर में अमोनिया गैस रिसाव से हुए हादसे ने न सिर्फ दो अफसरों की जान ली बल्कि किसानों के लिए भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। रवि की बुआई के बाद खाद की सबसे ज्यादा जरूरत के समय पी-1 प्लांट में यूरिया का उत्पादन ठप हो गया है। घटना के चलते चार दिन से उड़ीसा, बिहार, बंगाल व असम जैसे राज्यों में यूरिया की आपूर्ति नहीं हो सकी। हालांकि स्थानीय स्तर से ट्रकों के माध्यम से खाद भेजी जा रही है। लेकिन हालात यही रहे तो यहां भी खाद का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
गेहूं की बुआई के बाद किसान अब उसकी सिंचाई और खाद के छिड़काव में लगे हैं। इस वक्त गेहूं की फसल को यूरिया की जरूरत है। फूलपुर स्थित इफ्को में क्रमश: पी-1 एवं पी-2 में कुल तीन इकाइयां संचालित हैं। जिसमें पी-1 प्लांट में प्रतिदिन 22 सौ मिट्रिक टन अर्थात 50 हजार बोरी यूरिया तथा पी-2 प्लांट में भी 32 सौ मिट्रिक टन, कुल मिलाकर तकरीबन 54 सौ मिट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होता है।
यहां से खाद उत्तर प्रदेश समेत बिहार, बंगाल, उड़ीसा, असम को भेजी जाती है। इस तरह से 22 दिसंबर को हुए हादसे के बाद 88 मीट्रिक टन उत्पादन घटा है। इससे पिछले चार दिनों से गैर राज्यों में खाद नहीं भेजी जा सकी है। अकेले पी-2 प्लांट में हो रहे उत्पादन के सहारे किसी तरह आस पास के जिलों में खाद की सप्लाई की जा रही है। पी-1 प्लांट में अभी उत्पादन शुरू होने की संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसे में यूरिया खाद का संकट गहरा सकता है।