फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   If the state accepts the dues under the contracts, then the petition is maintainable: High Court

अनुबंधों के तहत राज्य बकाए को स्वीकार करता है तो याचिका पोषणीय: हाईकोर्ट

Tue, 11 Jan 2022 11:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 11 Jan 2022 11:59 PM IST
विज्ञापन
If the state accepts the dues under the contracts, then the petition is maintainable: High Court
allahabad highcourt - फोटो : social media
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि अनुबंध के आधार पर अगर सरकार बकाए की बात स्वीकार करती है तो याचिका पोषणीय है। संविधान की धारा 226 के तहत ऐसे बकाए के लिए याचिकाएं स्वीकार योग्य हैं और उन पर सुनवाई कर आदेश दिए जाने का अधिकार है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मेरठ की एजेंसी कनिका कंस्ट्रक्शन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
विज्ञापन



हाईकोर्ट के समक्ष याची की ओर से अनुबंध के तहत बकाए के भुगतान के संबंध में निर्देश देने की मांग की गई थी। याची का कहना है कि कोविड की पहली लहर के दौरान बैजल भवन, मेरठ और ओलिविया होटल में सामुदायिक किचन की सेवाएं प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन केसाथ अनुबंध किए गए थे। सेवाओं के बदले में कुल तीन करोड़, 68 लाख, 81 हजार, 217 रुपये जिला प्रशासन को देने थे।
विज्ञापन



लेकिन जिला प्रशासन ने 37 लाख, 32 हजार, 72 रुपये का भुगतान किया। शेष भुगतान सरकार द्वारा बजट आवंटित होने के बाद करने को कहा गया। याची की ओर से कहा गया कि  पर्याप्त समय बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। याची की ओर से कोर्ट में यह याचिका अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल कर भुगतान के लिए निर्देश दिए जाने की मांग की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन



कोर्ट ने याचिका को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत पोषणीय पाया और कहा क्योंकि, अनुबंध के आधार पर एजेंसी ने अनुबंधों के दायित्वों का पूरा निर्वहन किया, लिहाजा वह अपने बकायों का भुगतान प्राप्त करने की हकदार है।


सरकार भी अनुबंधों के आधार पर बकाए की बात स्वीकार कर रही है। हाईकोर्ट ने इस मामले में मेसर्स सौभाग्य इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मामले का संदर्भ लिया। हाईकोर्ट ने इस आधार पर याचिका को स्वीकार करते हुए सरकार को चार हफ्ते में बकाया रकम का भुगतान करने का आदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed