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Prayagraj News: शैक्षिक प्रमाण मौजूद तो अस्थि जांच की जरूरत नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Dec 2023 01:17 AM IST
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If educational evidence is present then there is no need for bone examination
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किशोर घोषित अपचारी की आयु निर्धारण के लिए अस्थि जांच कराने की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि शैक्षिक प्रमाण पत्र है तो आयु निर्धारण के लिए अस्थि जांच की जरूरत नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की अदालत ने याची की ओर से अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी को निचली अदालत द्वारा किशोर घोषित किए जाने वाले आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए सुनाया है।
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मामला सहारनपुर के थाना क्षेत्र रामपुर मनिहारन का है। दो जनवरी को याची ने बाल अपचारी के खिलाफ अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। बताया कि आरोपी उसकी बेटी को बहला-फुसला कर भागा ले गया और दो दिन बाद उसे वापस घर छोड़ गया। घर लौटी बेटी डरी-सहमी थी। विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम की धाराएं की बढ़ा दी गईं
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आरोपी के पिता की ओर से सहारनपुर के विशेष न्यायाधीश को अदालत में हाईस्कूल का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करते हुए उसे किशोर घोषित करने की मांग की गई। दावा किया गया कि कथित घटना की तारीख को आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम थी। अदालत ने आरोपी के हाईस्कूल के प्रमाणपत्र कम अंकित जन्मतिथि के आधार पर उसे किशोर घोषित कर दिया।
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निचली अदालत द्वारा आरोपी को किशोर घोषित करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याची ने कहा कि आरोपी की जन्मतिथि शैक्षिक प्रमाणपत्र में कम कर लिखाई गई है। वास्तव में वह बालिग है। अस्थि जांच करवा कर आरोपी की वास्तविक आयु का पता लगाया जाना जरूरी है।

कोर्ट ने आयु निर्धारण के लिए बाल अपचारी के अस्थि जांच की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 का हवाला देते हुए कहा कि शैक्षिक प्रमाणपत्र मौजूद है तो आयु निर्धारण के लिए उसे ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में अस्थि जांच की जरूरत नहीं है।
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