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Depression : सनक सताए तो डॉक्टर को दिखाएं, ठीक हो जाएंगे, नशे की लती हो रहे मेनिया डिप्रेशन के शिकार

Sun, 11 Jun 2023 01:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 11 Jun 2023 01:44 PM IST
सार

स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के मानसिक रोग विभाग में हर महीने दो से तीन हजार मानसिक रोगी आते हैं। इसमें लगभग डेढ़ हजार मरीज नशे के आदी होते हैं। इनमें से तकरीबन 200 नाबालिग होते हैं।

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If craze bothers you, show the doctor, you will be cured, victims of mania depression are getting addicted to
Depression - फोटो : Pixabay

विस्तार

मानसिक रोग का एक प्रमुख कारण नशे की लत है। मनोचिकित्सकों के अनुसार ऐसे मरीज मेनिया डिप्रेशन के शिकार होते हैं। वे किसी खास चीज से ज्यादा आकर्षित होकर उसी के रंग में रंग जाते है। लेकिन काउंसलिंग और नियमित इलाज से इनकी समस्या दूर हो जाती है।

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केस नंबर 1
मऊआइमा निवासी एक 20 वर्षीय मुस्लिम युवक को भांग व गांजा की लत थी। करीब 18 वर्ष की आयु में उसे लगा कि वह हिंदू है। खुद को बजरंग बली कहने लगा। कई जगह उसकी मारपीट भी हुई। गरीब परिवार का होने के कारण उसकी पढ़ाई-लिखाई पूरी न हो सकी। कूड़ा बीनने लगा। परेशान परिवार वाले उसे स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय लाए। काउंसलिंग हुई। दो साल से उसका इलाज स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में चल रहा है। पहले से सुधार है।

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केस -2
मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (काल्विन) में शुक्रवार को एक ऐसा मानसिक रोगी आया, जो कि नशे का आदी है। इस 17 वर्षीय युवक को लगता है कि वह हिंदू नहीं मुस्लिम है। उसके कई मुस्लिम दोस्त हैं। वह गरीब परिवार से है और ई रिक्शा चलाता है। अपनी मां के साथ अस्पताल पहुंचने पर वह मनकक्ष के डॉक्टरों को गाली देने लगा। मां ने डॉक्टरों को उसकी हरकतें बताईं। चिकित्सकों ने बताया कि उसे कुछ एंटी डिप्रेशन की दवाइयां दी गई हैं। काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है। इलाज नियमित चला तो ठीक होने की संभावना प्रबल है।

केस नंबर - 3
झूंसी निवासी 18 व 21 वर्षीय दो भाई नशे के आदी थे। बडा भाई सिगरेट व शराब और छोटा स्मैक, गांजा व शराब का आदी था। छोटे भाई को कुछ समय बाद लगने लगा कि वह बहुत अमीर आदमी है। आने वाले समय में वह प्रधानमंत्री बन जाएगा। सब उसके नौकर हैं। वह किसी से सीधे बात नहीं करता था। परिवार वाले उसकी हरकतों से ऊब गए। एसआरएन अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में दोनों भाइयों का इलाज चल रहा है। उम्मीद है दिमागी हालत सुधर जाएगी।

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हर महीने दो से तीन हजार आते हैं मरीज, अधिकतर नशे के आदी
स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के मानसिक रोग विभाग में हर महीने दो से तीन हजार मानसिक रोगी आते हैं। इसमें लगभग डेढ़ हजार मरीज नशे के आदी होते हैं। इनमें से तकरीबन 200 नाबालिग होते हैं। इतना ही नहीं हर महीने दो से तीन मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें लगता है कि वह जिस धर्म में पैदा हुए हैं वे उसके नहीं बल्कि किसी और धर्म के हैं।

अधिक नशा करना मानसिक रोग का कारण बनता है। इस प्रकार के कई मानसिक रोगियों का इलाज एसआरएन के मानसिक रोग विभाग में चल रहा है। पचहत्तर फीसदी मरीज ठीक हो जाते हैं। - डॉ. अभिनव टंडन, सहायक आचार्य, मानसिक रोग विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज।

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