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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   I am saddened that Allahabad is losing its character, said Tigmanshu Dhulia at the Hindvi Utsav.

प्रयागरा : मुझे दुख है कि इलाहाबाद अपना किरदार खो रहा है, हिंदवी उत्सव में बोले तिग्मांशु धूलिया

Sun, 23 Aug 2026 09:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 23 Aug 2026 09:15 PM IST
सार

जिस इलाहाबाद की अपनी खास फिजा, भाषा और सांस्कृतिक पहचान रही है, उसके बदलते स्वरूप पर दुख तिग्मांशु धूलिया की बातों में भी दिखाई दी।

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I am saddened that Allahabad is losing its character, said Tigmanshu Dhulia at the Hindvi Utsav.
एनसीजेडसीसी में आयोजित हिंदवी उत्सव में बोलते फिल्म निर्देशक तिग्मांशू धूलिया। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जिस इलाहाबाद की अपनी खास फिजा, भाषा और सांस्कृतिक पहचान रही है, उसके बदलते स्वरूप पर दुख तिग्मांशु धूलिया की बातों में भी दिखाई दी। शनिवार को एनसीजेडसीसी में आयोजित छठे हिन्दवी उत्सव में प्रश्नोत्तरी के रूप में हुए संवाद में अभिनेता और फिल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने कहा कि मुझे इस बात का दुख है कि इलाहाबाद अपना किरदार खो रहा है। उन्होंने शहर की बदलती पहचान के साथ छात्र नेताओं की बदलती प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए। अपने मित्र और साथी कलाकार इरफान को याद करते हुए उन्होंने उन्हें लगातार सकारात्मक बदलाव की दिशा में काम करने वाला कलाकार बताया।

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कार्यक्रम की शुरुआत में वरिष्ठ साहित्यकार प्रियंवद ने ‘मैं लेखक क्यों बना और लेखक क्यों बनना चाहिए’ जैसे सवालों पर अपने विचार रखे। करीब 50 वर्षों के लेखन अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि लेखन के पीछे सबसे पहला कारण लिखने का सुख होना चाहिए। उत्सव का अंतिम कार्यक्रम संगीत संध्या रहा। संतोष झा और उनके साथियों ने महादेवी वर्मा की कविता से प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद निराला, शमशेर, त्रिलोचन, मुक्तिबोध, वीरेन डंगवाल और गोरख पांडेय की कविताओं को संगीत के साथ प्रस्तुत किया गया। श्रोता देर तक इन प्रस्तुतियों में डूबे रहे। साहित्य, संवाद, कविता और संगीत के विविध रंगों के साथ छठा हिन्दवी उत्सव संपन्न हुआ।

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ऑल इंडिया कैंपस कविता प्रतियोगिता में प्रदीप्त प्रीत ने मारी बाजी

इसके बाद हिन्दवी के अखिल भारतीय कैंपस कविता आयोजन में चयनित 10 कवियों का कविता पाठ हुआ। सभी प्रतिभागियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। ऑनलाइन वोटिंग के आधार पर प्रदीप्त प्रीत ने पहला, प्रज्ज्वल चतुर्वेदी ने दूसरा और सागर कुमार ने तीसरा स्थान हासिल किया।

आलोचना, सेंसरशिप और ट्रोलिंग पर चर्चा

अगले सत्र में अकादमिक विमर्श के तहत साहित्यिक आलोचना, सेंसरशिप और सोशल मीडिया ट्रोलिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। सत्र का संचालन स्मृति सुमन ने किया। वक्ताओं के रूप में गगन गिल, बसंत त्रिपाठी और बलवंत कौर ने साहित्य और डिजिटल दौर की चुनौतियों पर विचार रखे। चर्चा का निष्कर्ष रहा कि साहित्य में मानवता है तो समाज उसका अनुसरण करेगा।

कविता ट्राम में एक याद पर बजीं तालियां

कविताई सत्र में वीरू सोनकर, विवेक निराला, गगन गिल और ज्ञानेंद्रपति समेत कवियों ने कविता पाठ किया। ज्ञानेंद्रपति की चर्चित कविता ‘ट्राम में एक याद’ सुनने की श्रोताओं ने विशेष फरमाइश की। कविता पाठ के बाद करीब दो मिनट तक श्रोता खड़े होकर तालियां बजाते रहे। रवि सोनकर समेत अन्य कवियों की प्रस्तुतियों ने भी श्रोताओं को बांधे रखा।

तीन नई किताबों का लोकार्पण

हिन्दवी उत्सव में हिन्दवी की ओर से तीन नई किताबों का लोकार्पण भी किया गया। इनमें पिछले वर्ष के अखिल भारतीय कैंपस कविता आयोजन की शीर्ष 10 कविताओं पर आधारित विशेष संकलन शामिल है। इसका संपादन कवि अविनाश मिश्र ने किया है। इस पहल को युवा कवियों की रचनाओं को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।

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