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पति के घर चोरी में पत्नी को तीन साल की कैद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 18 Sep 2016 01:04 AM IST
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इलाहाबाद। जिला न्यायालय ने पत्नी और ससुराल वालों की प्रताड़ना से पीड़ित पति को राहत देते हुए 19 साल बाद पत्नी और ससुराल वालों को सजा सुनाई है। इससे पहले भी अदालत पत्नी पर फर्जी मुकदमेबाजी के लिए दस हजार का हर्जाना लगा चुकी है। घर का ताला तोड़ कर गृहस्थी का सामान चोरी कर ले जाने का आरोप साबित होने पर आरोपी पत्नी वंदना शाहा, सास मीरानाथ, ससुर प्रतुल नाथ, साले प्रशांत नाथ और रवि सक्सेना को तीन-तीन साल की कैद और चार-चार हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह आदेश एसीजेएम डॉ. अनिल कुमार सिंह ने अभियोजन और वादी के अधिवक्ता रणेंद्र प्रताप सिंह और जगदीश त्रिपाठी को सुनकर दिया है।
अभियोजन के अनुसार मामला धूमनगंज थाने के केंद्रांचल कालोनी का है। वादी महालेखाकार कार्यालय के वरिष्ठ लेखाधिकारी देवव्रत साहा राय ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी वंदना साहा ने उसके खिलाफ दहेज का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। तीन अप्रैल 1997 को कोर्ट से जमानत कराकर जब वह घर पहुंचे तो रात नौ बजे उसकी सास मीरानाथ एसओ धूमनगंज के साथ आईं और जमानत करा लेने का आदेश दिखाने के बावजूद उसे मारते पीटते जीप में लाद कर थाने उठा ले गए । थाने पर भी उसकी पिटाई की गई और 20 घंटे हवालात में बंद रखा गया। बाद में शांति भंग में चालान करा दिया था। चार अप्रैल 1997 पत्नी सहित सभी आरोपी उसके घर का ताला तोड़ कर सारा सामान एक डीसीएम वाहन पर लाद कर उठा ले गए थे। अभियोजन ने वादी सहित पांच गवाह पेश किए।
आरोप साबित होने पर वंदना साहा और रवि सक्सेना को तीन तीन साल की कठोर कारावास और मीरानाथ और प्रतुल नाथ को साधारण कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। इससे पूर्व देवव्रत साहा दहेज उत्पीड़न के फर्जी मुकदमे से बरी हो चुके थे। इतना ही नहीं कोर्ट ने पति को फर्जी मुकदमे में फंसाने पर पत्नी वंदना पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
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अभियोजन के अनुसार मामला धूमनगंज थाने के केंद्रांचल कालोनी का है। वादी महालेखाकार कार्यालय के वरिष्ठ लेखाधिकारी देवव्रत साहा राय ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी वंदना साहा ने उसके खिलाफ दहेज का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। तीन अप्रैल 1997 को कोर्ट से जमानत कराकर जब वह घर पहुंचे तो रात नौ बजे उसकी सास मीरानाथ एसओ धूमनगंज के साथ आईं और जमानत करा लेने का आदेश दिखाने के बावजूद उसे मारते पीटते जीप में लाद कर थाने उठा ले गए । थाने पर भी उसकी पिटाई की गई और 20 घंटे हवालात में बंद रखा गया। बाद में शांति भंग में चालान करा दिया था। चार अप्रैल 1997 पत्नी सहित सभी आरोपी उसके घर का ताला तोड़ कर सारा सामान एक डीसीएम वाहन पर लाद कर उठा ले गए थे। अभियोजन ने वादी सहित पांच गवाह पेश किए।
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आरोप साबित होने पर वंदना साहा और रवि सक्सेना को तीन तीन साल की कठोर कारावास और मीरानाथ और प्रतुल नाथ को साधारण कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। इससे पूर्व देवव्रत साहा दहेज उत्पीड़न के फर्जी मुकदमे से बरी हो चुके थे। इतना ही नहीं कोर्ट ने पति को फर्जी मुकदमे में फंसाने पर पत्नी वंदना पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
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