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Prayagraj News: पति बरी, कोर्ट ने कहा-परिवार की मौजूदगी में दर्ज मृत्युपूर्व बयान पर भरोसा नहीं
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी को जलाने के मामले में दोषी ठहराए गए मुरादाबाद निवासी याची जगन को बरी कर दिया है। कहा कि मृत्युपूर्व बयान परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में दर्ज किया गया था। इसलिए उस पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। साथ ही न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने यह भी माना कि घटना के दौरान पत्नी को बचाने के प्रयास में पति के स्वयं झुलसने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
सिविल लाइंस थाने में याची के खिलाफ दहेज हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि दिसंबर 2015 को याची की पत्नी त्रिवेनी आग से झुलस गई थी। उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका मृत्युपूर्व बयान दर्ज किया गया। बयान में त्रिवेनी ने आरोप लगाया था कि पति ने उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी।
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ट्रायल कोर्ट ने 2018 में याची को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। याची ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। वहीं, मृतका के भाई ने बताया था कि मजिस्ट्रेट ने बयान उसके बेटे, उसकी पत्नी और बुआ समेत परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में दर्ज किया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में इस बयान को निर्णायक महत्व नहीं दिया जा सकता।
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कोर्ट ने यह भी पाया कि पति ने पत्नी को बचाने की कोशिश की थी। इस दौरान वह खुद भी झुलस गया था। डॉक्टर ने बताया कि त्रिवेनी को अस्पताल जगन की मां लेकर आई थीं। कोर्ट ने पाया कि दंपती को संतान न होने पर बच्चे को गोद लेने को लेकर विवाद था। उपलब्ध परिस्थितियों में यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि त्रिवेनी को जगन ने ही केरोसिन डालकर आग लगाई थी।