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पहली बार हमसफर एक्सप्रेस में लगे स्लीपर कोच
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Humsafar Express
- फोटो : CITY DESK
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सभी स्लीपर कोच रहे फुल, थर्ड एसी की 614 बर्थ रही खाली
प्रयागराज। इलाहाबाद जंक्शन से नई दिल्ली के लिए पहली बार हमसफर एक्सप्रेस स्लीपर कोच के साथ रवाना हुई। इसी के साथ शुक्रवार को इलाहाबाद हमसफर एक्सप्रेस देश की पहली ऐसी हमसफर श्रेणी की ट्रेन हो गई जिसमें स्लीपर कोच अब उपलब्ध है। पहले दिन हमसफर एक्सप्रेस में लगे स्लीपर कोच की सभी 320 बर्थ फुल रही। जबकि इसके थर्ड एसी की 1152 बर्थ में महज 538 बर्थ ही भरी। थर्ड एसी की 614 बर्थ खाली ही रही।
अमर उजाला द्वारा ही हमसफर एक्सप्रेस में स्लीपर कोच न होने की समस्या प्रकाशित की गई थी। इसके बाद एनसीआर प्रशासन ने रेलवे बोर्ड से इसमें स्लीपर कोच लगाने की गुजारिश की। एनसीआर जीएम राजीव चौधरी द्वारा लिखे जाने के महज 24 घंटे के भीतर ही बोर्ड ने हमसफर में स्लीपर के चार कोच लगाने की मंजूरी दे दी। इसी के साथ ही हमसफर अब तीन दिन की बजाय हर रोज चलेगी। हालांकि इसमें अभी लाल रंग वाले एलएचबी कोच जोड़े गए हैं। क्योंकि हमसफर के थर्ड एसी जैसे कोच अभी बोर्ड के पास नहीं है। उन कोचों को बनाने का आर्डर बोर्ड ने रेल कोच फैक्टरी को दे रखा है। पहले दिन हमसफर में स्लीपर कोच जोड़े जाने को लेकर यात्रियों में खासा क्रेज रहा। इस ट्रेन से दिल्ली जा रहे स्लीपर कोच के अधिकांश यात्रियों का यही कहना था कि हमसफर में कम से कम स्लीपर के चार और कोच जोड़े जाए। दिल्ली जा रही प्रियंका चौधरी, अनिल कुमार, ममता दुबे, प्रशांत कुमार ने कहा कि ट्रेन प्रयागराज एक्सप्रेस के मुकाबले समय कम लेती है। इस वजह से स्लीपर कोच इसमें और जुड़ने चाहिए। साथ ही थर्ड एसी श्रेणी से भी फ्लेक्सी फेयर हटाया जाए।
सभी थर्ड एसी कोच में डिजिटल रेल संग्रहालय
प्रयागराज। महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के मौके पर हमसफर एक्सप्रेस के सभी थर्ड एसी कोच के अंदर डिजिटल रेल संग्रहालय बनाया गया है। इसके अंतर्गत कोचों की दीवारों पर लगे पोस्टर में दिए क्यूआर कोड को स्मार्ट फोन से स्कैन करने पर फोन में रेलवे की विरासत की थ्री डी जानकारी प्राप्त हो सकेगी। सभी कोच में गांधी जी के विचारों और भारतीय रेलवे के साथ उनके जुड़ाव को कोचों के गैंगवे क्षेत्र में चित्रित किया गया है।
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प्रयागराज। इलाहाबाद जंक्शन से नई दिल्ली के लिए पहली बार हमसफर एक्सप्रेस स्लीपर कोच के साथ रवाना हुई। इसी के साथ शुक्रवार को इलाहाबाद हमसफर एक्सप्रेस देश की पहली ऐसी हमसफर श्रेणी की ट्रेन हो गई जिसमें स्लीपर कोच अब उपलब्ध है। पहले दिन हमसफर एक्सप्रेस में लगे स्लीपर कोच की सभी 320 बर्थ फुल रही। जबकि इसके थर्ड एसी की 1152 बर्थ में महज 538 बर्थ ही भरी। थर्ड एसी की 614 बर्थ खाली ही रही।
अमर उजाला द्वारा ही हमसफर एक्सप्रेस में स्लीपर कोच न होने की समस्या प्रकाशित की गई थी। इसके बाद एनसीआर प्रशासन ने रेलवे बोर्ड से इसमें स्लीपर कोच लगाने की गुजारिश की। एनसीआर जीएम राजीव चौधरी द्वारा लिखे जाने के महज 24 घंटे के भीतर ही बोर्ड ने हमसफर में स्लीपर के चार कोच लगाने की मंजूरी दे दी। इसी के साथ ही हमसफर अब तीन दिन की बजाय हर रोज चलेगी। हालांकि इसमें अभी लाल रंग वाले एलएचबी कोच जोड़े गए हैं। क्योंकि हमसफर के थर्ड एसी जैसे कोच अभी बोर्ड के पास नहीं है। उन कोचों को बनाने का आर्डर बोर्ड ने रेल कोच फैक्टरी को दे रखा है। पहले दिन हमसफर में स्लीपर कोच जोड़े जाने को लेकर यात्रियों में खासा क्रेज रहा। इस ट्रेन से दिल्ली जा रहे स्लीपर कोच के अधिकांश यात्रियों का यही कहना था कि हमसफर में कम से कम स्लीपर के चार और कोच जोड़े जाए। दिल्ली जा रही प्रियंका चौधरी, अनिल कुमार, ममता दुबे, प्रशांत कुमार ने कहा कि ट्रेन प्रयागराज एक्सप्रेस के मुकाबले समय कम लेती है। इस वजह से स्लीपर कोच इसमें और जुड़ने चाहिए। साथ ही थर्ड एसी श्रेणी से भी फ्लेक्सी फेयर हटाया जाए।
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सभी थर्ड एसी कोच में डिजिटल रेल संग्रहालय
प्रयागराज। महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के मौके पर हमसफर एक्सप्रेस के सभी थर्ड एसी कोच के अंदर डिजिटल रेल संग्रहालय बनाया गया है। इसके अंतर्गत कोचों की दीवारों पर लगे पोस्टर में दिए क्यूआर कोड को स्मार्ट फोन से स्कैन करने पर फोन में रेलवे की विरासत की थ्री डी जानकारी प्राप्त हो सकेगी। सभी कोच में गांधी जी के विचारों और भारतीय रेलवे के साथ उनके जुड़ाव को कोचों के गैंगवे क्षेत्र में चित्रित किया गया है।
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