{"_id":"5dd984a18ebc3e550545f472","slug":"human-rights-workshop-in-uprtou-allahabad-news-ald261001633","type":"story","status":"publish","title_hn":"हमारी संस्कृति एवं जीवन शैली में है मानवाधिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हमारी संस्कृति एवं जीवन शैली में है मानवाधिकार
विज्ञापन
Human rights workshop in UPRTOU
- फोटो : CITY DESK
मुक्त विवि में हुए व्याख्या में बोले न्यायमूर्ति रणविजय सिंह
प्रयागराज, 23 नवंबर। मानवाधिकार हमारी संस्कृति और जीवन शैली में है। हम हमेशा से प्रकृति एवं मानव के प्रति संवेदनशील रहे हैं। वर्तमा में मानवाधिकारों की दशा और दिशा बदलने की जरूरत है। यह बात न्यायमूर्ति रणविजय सिंह ने शनिवार को राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में ‘भारत में मानवाधिकार: दशा एवं दिशा’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में कही।
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह से पूर्व आयोजित विशेष व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति रणविजय सिंह ने कहा कि मानवाधिकार की दशा अत्यंत चिंतनीय है। शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। कहीं फैकल्टी की कमी है तो कहीं छात्र संख्या कम है। सुविधाएं पूरी नहीं मिल रहीं। हाईस्कूल फेल व्यक्ति नर्सरी विद्यालय चला रहा हैं तो वहा बच्चो की भीड़ है और प्राथमिक विद्यालयों का हाल यह है कि सरकार शिक्षकों को 40-45 हजार रुपये वेतन दे रही है लेकिन वहां बच्चे नहीं आ रहे। अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि व्यक्ति को जीवन के सभी पक्षों का यथार्थ बोध होना चाहिए। पश्चिमी संस्कृति के चश्मे से भारतीय संस्कृति को न देखा जाए। संचालन डॉ. रमेश चंद्र यादव, स्वागत प्रो. सुधांशु त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस. कुमार ने किया। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. अरुण कुमार गुप्ता, प्रो. ओमजी गुप्ता, प्रो. जीएस शुक्ला, प्रो. पीपी दूबे, प्रो. आशुतोष गुप्ता आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
प्रयागराज, 23 नवंबर। मानवाधिकार हमारी संस्कृति और जीवन शैली में है। हम हमेशा से प्रकृति एवं मानव के प्रति संवेदनशील रहे हैं। वर्तमा में मानवाधिकारों की दशा और दिशा बदलने की जरूरत है। यह बात न्यायमूर्ति रणविजय सिंह ने शनिवार को राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में ‘भारत में मानवाधिकार: दशा एवं दिशा’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में कही।
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह से पूर्व आयोजित विशेष व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति रणविजय सिंह ने कहा कि मानवाधिकार की दशा अत्यंत चिंतनीय है। शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। कहीं फैकल्टी की कमी है तो कहीं छात्र संख्या कम है। सुविधाएं पूरी नहीं मिल रहीं। हाईस्कूल फेल व्यक्ति नर्सरी विद्यालय चला रहा हैं तो वहा बच्चो की भीड़ है और प्राथमिक विद्यालयों का हाल यह है कि सरकार शिक्षकों को 40-45 हजार रुपये वेतन दे रही है लेकिन वहां बच्चे नहीं आ रहे। अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि व्यक्ति को जीवन के सभी पक्षों का यथार्थ बोध होना चाहिए। पश्चिमी संस्कृति के चश्मे से भारतीय संस्कृति को न देखा जाए। संचालन डॉ. रमेश चंद्र यादव, स्वागत प्रो. सुधांशु त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस. कुमार ने किया। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. अरुण कुमार गुप्ता, प्रो. ओमजी गुप्ता, प्रो. जीएस शुक्ला, प्रो. पीपी दूबे, प्रो. आशुतोष गुप्ता आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन