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High Court : पट्टाधारकों को आवंटित भूमि पर कैसे करा दिया सरकारी निर्माण, प्रमुख सचिव से जवाब तलब

Sat, 07 Feb 2026 03:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 07 Feb 2026 03:17 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के जेवर एयरपोर्ट के पास स्थित कृषि भूमि के आवंटन बहाली के आदेश की अवहेलना मामले में प्रमुख सचिव राजस्व से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है।

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How was government construction done on land allotted to lease holders
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के जेवर एयरपोर्ट के पास स्थित कृषि भूमि के आवंटन बहाली के आदेश की अवहेलना मामले में प्रमुख सचिव राजस्व से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। पूछा है कि जब कोर्ट पहले ही आवंटन बहाली का आदेश दे चुका है तो याची का नाम राजस्व अभिलेखों में अब तक दर्ज क्यों नहीं किया गया। उस जमीन पर सिविल कोर्ट का निर्माण कैसे करा दिया गया। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने गौतमबुद्ध नगर निवासी चंद्रशेखर शर्मा की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि हलफनामा संतोषजनक नहीं हुआ तो प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना होगा।

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मामला जेवर के जेवर बांगर क्षेत्र का है। दिसंबर 1998 में नगर पंचायत जेवर ने याची सहित 263 लोगों को कृषि भूमि के पट्टे देने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसे मई 1999 में एसडीएम जेवर ने मंजूरी दी थी। इसके बाद कुछ लोगों ने इस आवंटन के खिलाफ शिकायत की, जिससे यह मामला वर्षों तक कानूनी दांव-पेच में फंसा रहा।
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अपर कलेक्टर ने 2007 में इन आवंटनों को रद्द कर दिया, लेकिन बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने 2013 में आवंटन बहाल कर दिया। इसके खिलाफ गांव सभा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने दिसंबर 2022 में खारिज कर आवंटन बहाली के आदेश पर मुहर लगा दी। इसके बावजूद याची का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने पिक एंड चूज (अपनों को चुन कर फायदा पहुंचाने) की नीति अपनाई है। एक तरफ अन्य पट्टाधारकों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दिए गए, वहीं याची का नाम अब तक नहीं चढ़ाया गया। सुनवाई के दौरान स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि विवादित भूमि पर अब सिविल कोर्ट के निर्माण के साथ पौधरोपण किया जा चुका है। इसपर कोर्ट ने सख्त आपत्ति जताते हुए प्रमुख सचिव को 13 फरवरी तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

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