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हिम्मतगंज में ध्वस्त किए जाएंगे लटके मकान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:04 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हिम्मतगंज में खोदाई के बाद जलजमाव से नींव हिलने के कारण एक तरफ झुके चार मकान ध्वस्त किए जाएंगे। इस निर्णय के बाद खतरे की आशंका को देखते हुए बृहस्पतिवार को भी वहां बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद रखा गया। अफरातफरी के माहौल में सुबह से ही एडीए और नगर निगम के अफसर वहां डटे रहे। पूरा इलाका छावनी बना रहा। शाम को वहां पहुंचे डीएम ने लोगों को राहत का भरोसा दिलाया। मुआवजा मांगने वाले प्रभावित लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को भवन निर्माण के लिए पात्रता जांचने के बाद डूडा से ढाई लाख रुपये अनुदान राशि दिलाने का आश्वासन दिया गया है।
अनियोजित तरीके से की गई खोदाई के बाद खतरनाक स्थिति में पहुंचे मकानों का हाल देखकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश रहा। नाराज लोग पीड़ित परिवारों के साथ मौके पर ही डटे रहे। सुबह पुलिस के साथ वहां पहुंचे जोनल अधिकारी सुशील कुमार चौबे ने लोगों बात की स्थिति की भयावहता बताई। इसके बाद वहां तकनीकी अफसरों की टीम बुलाकर जर्जर हुए भवनों का मुआयना कराया गया। इंजीनियरों की टीम ने चारों मकानों को खतरनाक बताते हुए गिराने की रिपोर्ट दी है। सूत्र बताते हैं कि नगर निगम की ओर से आननफानन में की गई कार्रवाई में चारों मकानों को जनहित में ध्वस्त करने की अनुमति दे दी गई है। पूरे मामले की जिलाधिकारी और एडीए वीसी हर पल जानकारी लेते रहे। प्रभावित लोगों के साथ हिम्मतगंज-खुल्दाबाद व्यापार मंडल के पदाधिकारी और अन्य स्थानीय लोग जुटे रहे। सबने एक सुर से अफसरों की गलती से खतरनाक हुए मकानों के एवज में मुआवजा मांगा। शाम को हुई बारिश में भीगते हुए लोगों ने एडीए अफसरों के खिलाफ नारेबाजी भी की लेकिन अफसरों ने किसी तरह का आश्वासन न देकर जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण का फरमान सुनाया।
नागरिक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले पूर्व पार्षद शिवसेवक सिंह, वरिष्ठ पार्षद कमलेश सिंह, आनंद घिल्डियाल आदि ने जिलाधिकारी सुहास एलवाई से मुलाकात कर मुआवजा और रोजगार देने के लिए ज्ञापन सौंपा। उनसे कहा गया कि भवनों के लटकने और खतरनाक होने का कारण जानें फिर अफसरों पर कार्रवाई करें। पहले लोगों की दुकानें, मकान तोड़े गए अब अफसरों की गलती से लटके मकानों को ध्वस्त करने का तुगलकी आदेश दिया जा रहा है। वार्ता के दौरान प्रभावित गृहस्वामी नितिन कुमार, शुभम केसरवानी पुत्र विनोद कुमार, विजय लक्ष्मी, फिरोज खान, असलम आदि रोते हुए अपनी व्यथा सुनाई। पार्षदों ने कहा प्रभावित लोगों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। डीएम ने न केवल मौके का मुआयना किया बल्कि एडीएम वित्त को निर्देश दिया कि पीड़ितों की पात्रता जांच कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भवन निर्माण के लिए निर्धारित ढाई-ढाई लाख रुपये दिलाए जाएं। इसके लिए डूडा की परियोजनाधिकारी प्रतिभा श्रीवास्तव को भी निर्देश दिए गए हैं।
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प्रशासनिक निर्णय के तहत हिम्मतगंज में जलभराव के बाद लटकने से खतरनाक हुए चारों भवनों को मोहर्रम के बाद ध्वस्त किया जाएगा। लोग इस बात से परेशान हैं कि मुआवजा देने के नाम पर प्रशासन और एडीए के जिम्मेदार अफसर चुप्पी साधे रहे। भवन निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये अनुदान के आश्वासन से लोग संतुष्ट नहीं हैं। पीड़ितों का कहना है कि ढाई लाख में तो छत भी नहीं पड़ सकती, मकान कैसे बनवाएंगे।
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अनियोजित तरीके से की गई खोदाई के बाद खतरनाक स्थिति में पहुंचे मकानों का हाल देखकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश रहा। नाराज लोग पीड़ित परिवारों के साथ मौके पर ही डटे रहे। सुबह पुलिस के साथ वहां पहुंचे जोनल अधिकारी सुशील कुमार चौबे ने लोगों बात की स्थिति की भयावहता बताई। इसके बाद वहां तकनीकी अफसरों की टीम बुलाकर जर्जर हुए भवनों का मुआयना कराया गया। इंजीनियरों की टीम ने चारों मकानों को खतरनाक बताते हुए गिराने की रिपोर्ट दी है। सूत्र बताते हैं कि नगर निगम की ओर से आननफानन में की गई कार्रवाई में चारों मकानों को जनहित में ध्वस्त करने की अनुमति दे दी गई है। पूरे मामले की जिलाधिकारी और एडीए वीसी हर पल जानकारी लेते रहे। प्रभावित लोगों के साथ हिम्मतगंज-खुल्दाबाद व्यापार मंडल के पदाधिकारी और अन्य स्थानीय लोग जुटे रहे। सबने एक सुर से अफसरों की गलती से खतरनाक हुए मकानों के एवज में मुआवजा मांगा। शाम को हुई बारिश में भीगते हुए लोगों ने एडीए अफसरों के खिलाफ नारेबाजी भी की लेकिन अफसरों ने किसी तरह का आश्वासन न देकर जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण का फरमान सुनाया।
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नागरिक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले पूर्व पार्षद शिवसेवक सिंह, वरिष्ठ पार्षद कमलेश सिंह, आनंद घिल्डियाल आदि ने जिलाधिकारी सुहास एलवाई से मुलाकात कर मुआवजा और रोजगार देने के लिए ज्ञापन सौंपा। उनसे कहा गया कि भवनों के लटकने और खतरनाक होने का कारण जानें फिर अफसरों पर कार्रवाई करें। पहले लोगों की दुकानें, मकान तोड़े गए अब अफसरों की गलती से लटके मकानों को ध्वस्त करने का तुगलकी आदेश दिया जा रहा है। वार्ता के दौरान प्रभावित गृहस्वामी नितिन कुमार, शुभम केसरवानी पुत्र विनोद कुमार, विजय लक्ष्मी, फिरोज खान, असलम आदि रोते हुए अपनी व्यथा सुनाई। पार्षदों ने कहा प्रभावित लोगों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। डीएम ने न केवल मौके का मुआयना किया बल्कि एडीएम वित्त को निर्देश दिया कि पीड़ितों की पात्रता जांच कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भवन निर्माण के लिए निर्धारित ढाई-ढाई लाख रुपये दिलाए जाएं। इसके लिए डूडा की परियोजनाधिकारी प्रतिभा श्रीवास्तव को भी निर्देश दिए गए हैं।
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प्रशासनिक निर्णय के तहत हिम्मतगंज में जलभराव के बाद लटकने से खतरनाक हुए चारों भवनों को मोहर्रम के बाद ध्वस्त किया जाएगा। लोग इस बात से परेशान हैं कि मुआवजा देने के नाम पर प्रशासन और एडीए के जिम्मेदार अफसर चुप्पी साधे रहे। भवन निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये अनुदान के आश्वासन से लोग संतुष्ट नहीं हैं। पीड़ितों का कहना है कि ढाई लाख में तो छत भी नहीं पड़ सकती, मकान कैसे बनवाएंगे।