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देश में ईमानदार लोग विलुप्त वन्यजीवों की तरह: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 12 Jan 2018 02:42 AM IST
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इलाहबाद हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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हाईकोर्ट ने बढ़ती बेईमानी और भ्रष्टाचार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दैनिक कार्य का हिस्सा बन गया है। देश में निष्ठावान और ईमानदार लोगों की संख्या घटती जा रही है। ईमानदार लोग वन्यजीवों की तरह विलुप्त प्राणी बनते जा रहे हैं। इनके संरक्षण की आवश्यकता है। सरकार को ईमानदारों और निष्ठावान लोगों को प्रोत्साहित करने की योजना पर अमल करने तथा भ्रष्टाचारियों को दंडित करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने मेरठ विकास प्राधिकरण में प्लाट आवंटन में हुए घोटाले की जांच विजिलेंस से कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कहा है कि तीन माह में जांच रिपोर्ट उनके समक्ष प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने प्रमुख सचिव शहरी विकास को जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई एक साल के भीतर पूरी कर दंडित करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्राधिकरण द्वारा गलत तरीके से किए गए प्लाट आवंटन को निरस्त कर दिया है, साथ ही प्राधिकरण की निर्देश दिया है कि वह याची को हर्जाने के तौर पर 50 हजार रुपये का भुगतान करे। नरेंद्र कुमार त्यागी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने दिया है।
याची का कहना था कि डिफेंस इंक्लेव योजना मेरठ में विकास प्राधिकरण को याची ने प्लाट आवंटन का टेंडर दिया था। प्लाट संख्या बी 399 की नीलामी में याची की अधिकतम बोली स्वीकार की गई। उसने 13500 के बदले 14000 प्रति वर्ग मीटर की बोली लगाई थी। याची को 10 दिन बाद पता चला की वह प्लाट अंजू नाम की महिला को 14200 की दर पर आवंटित कर दिया गया है। जब कि वह नीलामी के समय मौजूद नहीं थी। जांच में पुष्टि भी हुई। याची ने उपाध्यक्ष पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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हाईकोर्ट ने मेरठ विकास प्राधिकरण में प्लाट आवंटन में हुए घोटाले की जांच विजिलेंस से कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कहा है कि तीन माह में जांच रिपोर्ट उनके समक्ष प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने प्रमुख सचिव शहरी विकास को जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई एक साल के भीतर पूरी कर दंडित करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्राधिकरण द्वारा गलत तरीके से किए गए प्लाट आवंटन को निरस्त कर दिया है, साथ ही प्राधिकरण की निर्देश दिया है कि वह याची को हर्जाने के तौर पर 50 हजार रुपये का भुगतान करे। नरेंद्र कुमार त्यागी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने दिया है।
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याची का कहना था कि डिफेंस इंक्लेव योजना मेरठ में विकास प्राधिकरण को याची ने प्लाट आवंटन का टेंडर दिया था। प्लाट संख्या बी 399 की नीलामी में याची की अधिकतम बोली स्वीकार की गई। उसने 13500 के बदले 14000 प्रति वर्ग मीटर की बोली लगाई थी। याची को 10 दिन बाद पता चला की वह प्लाट अंजू नाम की महिला को 14200 की दर पर आवंटित कर दिया गया है। जब कि वह नीलामी के समय मौजूद नहीं थी। जांच में पुष्टि भी हुई। याची ने उपाध्यक्ष पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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