Holi 2023 : अर्धरात्रि के बाद जली होलिकाएं, कष्टों-विकारों का दहन
सोमवार की अर्धरात्रि के बाद होलिका दहन शुरू हो गया। रात 12:40 बजे से सविधि पूजा के बाद असत्य की प्रतीक होलिकाएं जलाई जाने लगीं। भद्राकाल से मुक्त पूर्णिमा में होलिका दहन किया गया।
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सोमवार की अर्धरात्रि के बाद होलिका दहन शुरू हो गया। रात 12:40 बजे से सविधि पूजा के बाद असत्य की प्रतीक होलिकाएं जलाई जाने लगीं। भद्राकाल से मुक्त पूर्णिमा में होलिका दहन किया गया। इस बार तिथि और योग में साम्य न होने की वजह से मंगलवार को भी कई जगह होलिका दहन होगा।
शहर से लेकर ग्राम्यांचलों तक तिराहों, चौराहों पर स्थापित होलिकाओं में वर्ष भर के कष्टों, विकारों को जलाने का सिलसिला आधी रात के बाद आरंभ हुआ। इस बार होलिका में लोगों ने शरीर के विकारों की पोटलियां जलाईं। भद्रा से मुक्त पूर्णिमा में सविधि हवन-पूजन के साथ होलिका दहन किया गया। बुधवार को रंगोत्सव पर्व पर संगमनगरी में रंगों की बौछार मचेगी।
फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि सोमवार की शाम 4:18 बजे आरंभ हो गई। मंगलवार की शाम 6:10 बजे तक पूर्णिमा रहेगी। शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा के साथ भद्रा हो तो पूर्णिमा के रहते हुए भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन किया जाना चाहिए। यह पुच्छकाल इस बार छह मार्च की मध्यरात्रि के बाद 12:40 से आरंभ हुआ। ऐसे में इसी अवधि से होलिका दहन आरंभ हो गया।
संगम पर प्रयागराज सेवा सामिति की ओर से रआदी रात को होलिका दहन किया गया। इस बार रवि और महाभाग्य योग में होलिका दहन किया गया। इससे पहले महीने भर से शहर केहर मोहल्ले में स्थापित बुराई की प्रतीक होलिकाएं शनिवार की देर शाम तक लकड़ी और उपले से ऊंची की जाती रहीं। घर-घर से होलिकाओं में विकारों को जलाने निकले। पुरोहितों की ओर से हवन-पूजन के बाद होलिकाओं में आग लगाई गई। इस बार मंगलवार को पूर्णिमा होने की वजह से इस दिन रंगों की होली नहीं खेली जाएगी। रंगों की होली बुधवार को होगी।
हिरण्याकश्यप की बहन थी होलिका
मान्यता के अनुसार होलिका दहन की परंपरा पौराणिक काल में हिरण्यकश्यप राजा से जुड़ी हुई है। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक पौराणिक कथाओं में किसी समय राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने की कोशिश की थी। लेकिन, जब प्रह्लाद की भक्ति और गाढ़ी होती गई तब उसने अपनी बहन होलिका की गोद में अपने पुत्र को जलाकर मार डालने की योजना बनाई थी। होलिका को वरदान था कि आग लगने पर वह नहीं जल सकती थी। लेकिन, प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठने के बाद वह खुद जल गई और भगवान ने अपने भक्त को बचा लिया था। तभी सो होलिका दहन की परंपरा सनातन संस्कृति में ऊंचे मानकों पर स्थापित है।
अराजकतत्वों ने होलिका में लगा दी आग
शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के छतरी कोटी में अराजकतत्वों ने होलिका में सोमवार को आग लगा दी। कुछ ही देर में होलिका जलने लगी। इसे लेकर लोगों में आक्रोश है। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की है।
शंकरगढ़ में छतरी कोटी में अरसे से होलिका सजाई जाती है और नगर के लोग होलिका दहन कर अगले दिन होली मनाते हैं। सोमवार को अराजकतत्वों द्वारा समय से पहले ही दोपहर में होलिका दहन कर दिया। जैसे ही पता चला कि होलिका में किसी ने आग लगा दिया है तो नगर के लोग इकट्ठे हो गए और आक्रोश व्यक्त करने लगे। दीपक केसरवानी आदि लोगों ने थाने में लिखित शिकायत कर होलिका दहन कर माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।