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Highcourt news: ओबरा के सर्वे लेखपालों की नियुक्ति निरस्त करने का आदेश रद्द
Mon, 11 Jan 2021 11:40 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 11 Jan 2021 11:40 PM IST
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allahabad highcourt
- फोटो : prayagraj
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र, ओबरा के सर्वे लेखपालों की नियुक्ति निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है और याचियों को समस्त सेवा परिलाभों का हकदार करार दिया है।
सहायक अभिलेख अधिकारी ओबरा ने कैमूर सर्वे एजेंसी के कर्मियों को समायोजित करने के लिए याचियों की नियुक्ति निरस्त कर दी थी। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने चंद्र शेखर सिंह यादव व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याचीगण को 11 जुलाई 96 को अस्थायी सर्वे लेखपाल पद पर नियुक्ति की गयी। 17 सितंबर 96 को सरकार ने नियुक्ति पर बैन लगा दिया और कहा कि जो नियुक्ति या प्रोन्नति की गयी है वह स्वत: निरस्त हो जायेगी।
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16 अक्तूबर 96 को आयुक्त वाराणसी ने जिलाधिकारी वाराणसी व मिर्जापुर को कैमूर सर्वे एजेंसी के 36 कर्मचारियों के समायोजन का आदेश दिया, जिसके कारण याचियों को सेवा से हटा दिया गया।
इस आदेश को चुनौती दी गई थी। याचियों का कहना था कि नियुक्ति पर बैन लगाने का सरकारी आदेश उनकी नियुक्ति के बाद आया है। इसलिए उनपर लागू नहीं होगा। दूसरे नियमानुसार बिना एक माह की नोटिस दिए बर्खास्त करने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है। कोर्ट ने याचियों की बर्खास्तगी रद्द कर दी
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सहायक अभिलेख अधिकारी ओबरा ने कैमूर सर्वे एजेंसी के कर्मियों को समायोजित करने के लिए याचियों की नियुक्ति निरस्त कर दी थी। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने चंद्र शेखर सिंह यादव व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
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याचीगण को 11 जुलाई 96 को अस्थायी सर्वे लेखपाल पद पर नियुक्ति की गयी। 17 सितंबर 96 को सरकार ने नियुक्ति पर बैन लगा दिया और कहा कि जो नियुक्ति या प्रोन्नति की गयी है वह स्वत: निरस्त हो जायेगी।
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16 अक्तूबर 96 को आयुक्त वाराणसी ने जिलाधिकारी वाराणसी व मिर्जापुर को कैमूर सर्वे एजेंसी के 36 कर्मचारियों के समायोजन का आदेश दिया, जिसके कारण याचियों को सेवा से हटा दिया गया।
इस आदेश को चुनौती दी गई थी। याचियों का कहना था कि नियुक्ति पर बैन लगाने का सरकारी आदेश उनकी नियुक्ति के बाद आया है। इसलिए उनपर लागू नहीं होगा। दूसरे नियमानुसार बिना एक माह की नोटिस दिए बर्खास्त करने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है। कोर्ट ने याचियों की बर्खास्तगी रद्द कर दी