{"_id":"58a367084f1c1b5f7ed85dd0","slug":"highcourt-news-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रापर्टी डीलर की तरह वसूली नहीं कर सकते बैंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रापर्टी डीलर की तरह वसूली नहीं कर सकते बैंक
अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 15 Feb 2017 02:09 AM IST
विज्ञापन
court
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने कहा है कि बैंकों को प्रापर्टी डीलरों की तरह कानून के विपरीत जाकर मनमाने तरीके से कर्ज की वसूली का अधिकार नहीं है। वह ग्राहक को दिया कर्ज वसूल सकते हैं मगर इसके लिए बने कानूनों के दायरे में रह कर। लोन वसूली की प्रक्रिया के नियम बनाए गए हैं जो बाध्यकारी हैं। इसका पालन नहीं करने पर पूरी प्रक्रिया अवैध हो जाएगी।
वाराणसी के अशोक कुमार की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने पंजाब नेशनल बैंक की महमूरगंज शाखा द्वारा लोन वसूली के लिए याची का मकान सस्ते में बेचने की कार्यवाही रद्द कर दी है। याची ने बैंक से दस लाख रुपये का कर्ज मकान बनवाने के लिए लिया था। किश्ते अदा न करने पर बैंक ने उसका मकान जब्त कर लिया। बकाया नौ लाख वसूलने के लिए बैंक ने याची का मकान जानकी देवी को आठ लाख 10 हजार 351 रुपये में ही बेंच दिया। मकान और जमीन का बाजार मूल्य 22 लाख रुपये से अधिक था।
इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई। याची का कहना था कि बैंक ने जानबूझकर मकान का सही मूल्यांकन किए बिना उसे सस्ते में बेंच दिया। ऐसा करने से पूर्व उसको आवश्यक नोटिस भी नहीं दिया गया। कोर्ट ने बिक्री की कार्यवाही रद्द करते हुए बैंक को निर्देश दिया है कि वह क्र्रेता जानकारी देवी को मकान की कीमत दस फीसदी ब्याज के साथ वापस करे साथ ही याची पर बकाया ब्याज की गणना कर चार सप्ताह में उसे जमा कराया जाए। यदि याची भुगतान नहीं करता है तो वैधानिक प्रक्रिया द्वारा उससे वसूली की जाए। कोर्ट ने कहा कि बैंक को नियमानुसार मकान बेचने से एक माह पूर्व याची को नोटिस देना चाहिए था जो नहीं दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी के अशोक कुमार की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने पंजाब नेशनल बैंक की महमूरगंज शाखा द्वारा लोन वसूली के लिए याची का मकान सस्ते में बेचने की कार्यवाही रद्द कर दी है। याची ने बैंक से दस लाख रुपये का कर्ज मकान बनवाने के लिए लिया था। किश्ते अदा न करने पर बैंक ने उसका मकान जब्त कर लिया। बकाया नौ लाख वसूलने के लिए बैंक ने याची का मकान जानकी देवी को आठ लाख 10 हजार 351 रुपये में ही बेंच दिया। मकान और जमीन का बाजार मूल्य 22 लाख रुपये से अधिक था।
विज्ञापन
इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई। याची का कहना था कि बैंक ने जानबूझकर मकान का सही मूल्यांकन किए बिना उसे सस्ते में बेंच दिया। ऐसा करने से पूर्व उसको आवश्यक नोटिस भी नहीं दिया गया। कोर्ट ने बिक्री की कार्यवाही रद्द करते हुए बैंक को निर्देश दिया है कि वह क्र्रेता जानकारी देवी को मकान की कीमत दस फीसदी ब्याज के साथ वापस करे साथ ही याची पर बकाया ब्याज की गणना कर चार सप्ताह में उसे जमा कराया जाए। यदि याची भुगतान नहीं करता है तो वैधानिक प्रक्रिया द्वारा उससे वसूली की जाए। कोर्ट ने कहा कि बैंक को नियमानुसार मकान बेचने से एक माह पूर्व याची को नोटिस देना चाहिए था जो नहीं दिया गया।
विज्ञापन