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आईटीआई संस्थानों में छात्रों के प्रवेश पर कोर्ट ने दी बड़ी राहत
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प्रयागराज । हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राइवेट आईटीआई संस्थानों के छात्रों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि पांच अक्तूबर 18 से पहले प्रवेश ले चुके सभी छात्रों को 22 जुलाई से होने वाली परीक्षा में बैठने दिया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने डॉ वीरेंद्र स्वरूप प्राइवेट आईटीआई सहित कई अन्य याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है।
एनसीवीटी के पोर्टल पर ब्योरा अपलोड न होने के कारण छात्रों को हाल टिकट प्रवेश पत्र जारी नहीं हो सका। जिससे वे परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे थे। कोर्ट ने आईटीआई छात्रों को परीक्षा में बैठने की छूट देते हुए कहा है कि22 जुलाई के बाद छात्रों का ब्योरा अपलोड किया जाए । बायोमेट्रिक उपस्थिति को इस सत्र में अनिवार्य रूप से लागू करने को शिथिल करते हुए कोर्ट ने कहा है कि इसे भविष्य में सत्र की शुरुआत से ही लागू किया जाए।
कोर्ट के इस आदेश से संस्थानों की लापरवाही के कारण परीक्षा में बैठने से बंचित हो रहे हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
आईटीआई संस्थानों ने छात्रों के प्रवेश कर उनका ब्योरा समय से एनसीवीटी के पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था। जिसके चलते उन्हें हाल टिकट जारी नहीं हो पा रहा था। नियमानुसार एनसीवीटी के एमआईएस पोर्टल पर ब्योरा अपलोड होने पर ही हाल टिकट जारी किया जा सकता है।
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संस्थान एससीवीटी के पोर्टल पर ब्योरा अपलोड करते हैं। एससीवीटी उसका सत्यापन व अनुमोदन कर करती है। कालेजों ने एससीवीटी को तमाम छात्रों का ब्योरा दिया ही नहीं। जिससे अपलोड छात्रों को ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। केंद्रीय संस्था ने राज्य संस्था को 29 मार्च 19 तक ब्योरा अपलोड करने का निर्देश दिया था। किंतु संस्थानों से ब्योरा न मिल पाने के कारण भेजा नहीं जा सका। इस पर संस्थानों व छात्रों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। याचिकाओं पर वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी सिंह, आरसी सिंह, संजीव सिंह, शिव सागर सिंह, एससीवीटी के अधिवक्ता पंकज पटेल व भारत सरकार के अधिवक्ता कृष्ण जी शुक्ल, बृजेश श्रीवास्तव, दीपमाला श्रीवास्तव व अन्य ने पक्ष रखा। केंद्र सरकार का मत था कि पांच अक्तूबर 18 तक ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी। एससीवीटी के पोर्टल पर पंजीकृत छात्रों का ही प्रवेश संस्थानों में किया जाना था और प्रवेश का ब्योरा राज्य पोर्टल के माध्यम से केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करना था।एनसीवीटी ने कई मौके दिए किंतु ब्योरा नहीं दिया गया। जिन छात्रों का ब्योरा अपलोड नहीं हो सका था उन्हें प्रवेश पत्र जारी नहीं किया गया था।
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एनसीवीटी के पोर्टल पर ब्योरा अपलोड न होने के कारण छात्रों को हाल टिकट प्रवेश पत्र जारी नहीं हो सका। जिससे वे परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे थे। कोर्ट ने आईटीआई छात्रों को परीक्षा में बैठने की छूट देते हुए कहा है कि22 जुलाई के बाद छात्रों का ब्योरा अपलोड किया जाए । बायोमेट्रिक उपस्थिति को इस सत्र में अनिवार्य रूप से लागू करने को शिथिल करते हुए कोर्ट ने कहा है कि इसे भविष्य में सत्र की शुरुआत से ही लागू किया जाए।
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कोर्ट के इस आदेश से संस्थानों की लापरवाही के कारण परीक्षा में बैठने से बंचित हो रहे हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
आईटीआई संस्थानों ने छात्रों के प्रवेश कर उनका ब्योरा समय से एनसीवीटी के पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था। जिसके चलते उन्हें हाल टिकट जारी नहीं हो पा रहा था। नियमानुसार एनसीवीटी के एमआईएस पोर्टल पर ब्योरा अपलोड होने पर ही हाल टिकट जारी किया जा सकता है।
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संस्थान एससीवीटी के पोर्टल पर ब्योरा अपलोड करते हैं। एससीवीटी उसका सत्यापन व अनुमोदन कर करती है। कालेजों ने एससीवीटी को तमाम छात्रों का ब्योरा दिया ही नहीं। जिससे अपलोड छात्रों को ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। केंद्रीय संस्था ने राज्य संस्था को 29 मार्च 19 तक ब्योरा अपलोड करने का निर्देश दिया था। किंतु संस्थानों से ब्योरा न मिल पाने के कारण भेजा नहीं जा सका। इस पर संस्थानों व छात्रों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। याचिकाओं पर वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी सिंह, आरसी सिंह, संजीव सिंह, शिव सागर सिंह, एससीवीटी के अधिवक्ता पंकज पटेल व भारत सरकार के अधिवक्ता कृष्ण जी शुक्ल, बृजेश श्रीवास्तव, दीपमाला श्रीवास्तव व अन्य ने पक्ष रखा। केंद्र सरकार का मत था कि पांच अक्तूबर 18 तक ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी। एससीवीटी के पोर्टल पर पंजीकृत छात्रों का ही प्रवेश संस्थानों में किया जाना था और प्रवेश का ब्योरा राज्य पोर्टल के माध्यम से केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करना था।एनसीवीटी ने कई मौके दिए किंतु ब्योरा नहीं दिया गया। जिन छात्रों का ब्योरा अपलोड नहीं हो सका था उन्हें प्रवेश पत्र जारी नहीं किया गया था।