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बालिग को है अपनी मर्ज़ी के व्यक्ति के साथ रहने का हक, परिवार को हस्तक्षेप का हक नहींः हाईकोर्ट

Thu, 28 May 2020 02:47 PM IST
news desk amar ujala, prayagraj Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Thu, 28 May 2020 02:47 PM IST
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high court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लड़का-लड़की स्त्री और पुरुष अपनी मर्जी से जहां, जिसके साथ रहना चाहें रह सकते हैं। अभिभावकों, कोर्ट या पारिवारिक रिश्तेदारों को उनके जीवन की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि बालिग लड़का या लड़की अपनी पसंद से जिसके साथ रहना चाहें रह सकते हैं। मगर कोर्ट ने परिवार द्वारा उन्हें परेशान करने से एवं जीवन स्वतंत्रता हस्तक्षेप करने से रोकने का आदेश देने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। मगर याचीगण को छूट दी है कि वह नियमानुसार परेशान करने वालों के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई कर सकते है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने रेशमा देवी व अन्य की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और अपने पति के साथ रह रही है। उसके परिवार वाले उसे परेशान कर रहे हैं। अपर महाधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने याचिका को यह कहते हुए खारिज करने की मांग की, कि याची ने 6 सितंबर 2019 को शादी की तो उस समय वह नाबालिग थी।
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नाबालिग को संरक्षण देने का अधिकार माता- पिता को है। याचिका पोषणीय नहीं है। किन्तु कोर्ट ने कहा कि याची वर्तमान में 18 वर्ष से अधिक आयु की है, बालिग है। उसे अपनी मर्जी से जहां चाहे रहने का अधिकार है।
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